प्रदेश में मनरेगा श्रमिकों की मजदूरी के देर से भुगतान पर केंद्र सरकार ने गहरी नाराजगी जताई है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने प्रदेश सरकार को बकाया मजदूरी भुगतान के लंबित मामलों का 31 अगस्त तक निबटारा करने के निर्देश दिए हैं।
साथ ही आगाह किया है कि वह अब मजदूरी के मुआवजे के लंबित मामलों पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाएगा।
15 दिन में करना होता है भुगतान
मनरेगा में श्रमिकों को काम के 15 दिन के भीतर मजदूरी भुगतान की व्यवस्था है। समय से भुगतान नहीं होने पर राज्य सरकार की ओर से मजदूरों को मुआवजा देने का प्रावधान है।
यह मुआवजा कुल बकाया मजदूरी का .05 प्रतिशत होता है। मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार सूबे में वर्ष 2014-15 में मुआवजे की यह रकम एक करोड़ 90 लाख रुपये है।
केंद्र सरकार की समीक्षा में पता चला कि महाराष्ट्र व छत्तीसगढ़ को छोड़कर अन्य किसी भी राज्य ने मजदूरी के देरी से भुगतान के मामलों को महत्व नहीं दिया जिससे बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित पड़े हुए हैं।
31 अगस्त तक दिया समय
समीक्षा के दौरान ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस (कोई छूट न देने) की नीति अपनाने का फैसला हुआ। ग्रामीण विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मनरेगा) आर. सुब्रह्मण्यम ने देर से भुगतान मामले की उपेक्षा करने पर अन्य प्रदेशों के साथ यूपी के प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास को भी पत्र लिखा है।
इसमें अभियान चलाकर 31 अगस्त तक देर से भुगतान से जुड़े सभी मामलों का निबटारा करने को कहा गया है।
अपर आयुक्त मनरेगा अनिल राजकुमार ने केंद्र से पत्र मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि जिलों को इस संबंध में समयबद्ध कार्यवाही के लिए निर्देशित किया जा रहा है।
...तो नहीं मिलेगी नए फंड ट्रांसफर की इजाजत
केंद्र ने आगाह किया है कि विलंब से मजदूरी के भुगतान का मामला यदि 15 दिन से अधिक लंबित रहता है तो एक सितंबर से नरेगासॉफ्ट सॉफ्टवेयर नए फंड ट्रांसफर की इजाजत नहीं देगा।
यदि पैसे की कमी या किसी मान्य वजह से भुगतान में विलंब है तो इसे कारण सहित स्पष्ट करना होगा।