राज्य के बिजलीघरों के उत्पादन में भारी कमी के चलते प्रदेश की बिजली व्यवस्था लड़खड़ा गई है। रविवार को अनपरा बिजलीघर की 500 मेगावाट क्षमता की दूसरी इकाई भी ठप हो गई।
प्रदेश के 4933 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों का उत्पादन घटकर 1650 मेगावाट के आसपास रह गया है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखना पावर कॉर्पोरेशन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
एनर्जी एक्सचेंज से अतिरिक्त बिजली खरीदने तथा जम्मू-कश्मीर व हिमाचल प्रदेश से बैंकिंग के जरिये बिजली लेने के बावजूद कमी बनी हुई है और शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति करने में कॉर्पोरेशन को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। फिलहाल जल्द हालात सुधरने के आसार नहीं दिखाई दे रहे हैं।
उधार ली जा रही 370 मेगावाट बिजली
एक के बाद एक बंद हो रही राज्य विद्युत उत्पादन निगम के बिजलीघरों की इकाइयों ने प्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था पटरी से उतार दी है। कोयले की कमी से बंद हुई पारीछा की इकाइयों से उत्पादन पूरी तरह से शुरू भी नहीं हो पाया कि अनपरा की 500 मेगावाट की एक और इकाई बंद हो गई।
इसी बिजलीघर की 500 मेगावाट की एक इकाई पहले से बंद है। प्रदेश के सबसे बड़े 1630 मेगावाट क्षमता के अनपरा बिजलीघर से बमुश्किल 450 मेगावाट बिजली ही मिल पा रही है।
अन्य बिजलीघरों में क्षमता से कम उत्पादन हो रहा है। अनपरा की इकाई के बंद होने के बाद से एनर्जी एक्सचेंज से लगभग 1000 मेगावाट बिजली खरीदने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर व हिमाचल प्रदेश से लगभग 370 मेगावाट बिजली बैंकिंग (उधार) के जरिये ली जा रही है।
बिजली की उपलब्धता मात्र 11,000 वाट
शक्ति भवन स्थित नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं के अनुसार प्रदेश में बिजली की मांग 12000 मेगावाट से ऊपर है जबकि उपलब्धता 11,000 मेगावाट क आसपास है।
केंद्र से 6600 मेगावाट से ज्यादा बिजली मिल रही है। शेष बिजली का इंतजाम अन्य स्रोतों से किया जा रहा है। कृषि लोड बढ़ने से भी दबाव है। अतिरिक्त बिजली की व्यवस्था करके शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति की कोशिश तो की जा रही है लेकिन गाहे-बगाहे अतिरिक्त आपात कटौती करनी पड़ रही है।
अभियंताओं का कहना है कि रविवार को बंद हुई अनपरा की इकाई को चालू करने में वक्त लग सकता है। राज्य केबिजलीघरों का उत्पादन सुधरने के बाद ही आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर आने के आसार हैं।
कहां कितनी औसत बिजली आपूर्ति
ग्रामीण--9 घंटे
तहसील--9 घंटे
जिला मुख्यालय--17.09 घंटे
मंडल मुख्यालय--20.56 घंटे
बुंदेलखंड--16. 20 घंटे
महानगर--21.15 घंटे
उद्योग--24 घंटे
बिजली संकट पर पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक एपी मिश्र का कहना है कि ‘बिजलीघरों के उत्पादन में कमी जरूर हुई है लेकिन अतिरिक्त बिजली का इंतजाम किया गया है। एनर्जी एक्सचेंज व बैंकिंग के जरिये अतिरिक्त बिजली लेकर शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति की कोशिश की जा रही है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। कहीं भी बहुत ज्यादा अतिरिक्त आपात कटौती नहीं की जा रही है।’