उमीफेनोविर एक एंटी वायरल दवा है। अभी तक रूस और चीन के पास ही इसे बनाने के लिए जरूरी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी है। उनके पेटेंट का हम उपयोग नहीं कर सकते हैं और अन्य किसी देश में यह उपलब्ध नहीं है। हाल ही में कोविड-19 के रोगियों के लिए इसके संभावित उपयोग को चिह्नित किया गया है। ऐसे में सीडीआरआई ने तीन महीने में इस दवा के देसी वर्जन के लिए अपनी प्रॉसेस टेक्नोलॉजी विकसित कर ली।
120 में चुने गए 30 कंपाउंड में से पहला: सीडीआरआई ने कुल 120 कंपाउंड कोरोना की संभावित दवा के लिए चुने थे। उसमें से 30 को प्रभावी पाया गया। यह पहला कंपाउंड है जिसका क्लीनिकल ट्रायल शुरू हो रहा है। खास बात है कि इसके उत्पादन के लिए किसी भी एक्टिव फार्मास्युटिकल्स इंग्रीडिएंट को आयात करने की जरूरत नहीं होगी।
गोवा की निजी फार्मा कंपनी को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सीडीआरआई ने की है। फार्मा कंपनी भी अलग से डीजीसीआई से क्लीनिकल ट्रायल की अनुमति ले चुकी है।
दवा के निर्माण और बिक्री का लाइसेंस उनके पास है जिससे क्लीनिकल ट्रायल सफल रहने पर न्यूनतम समय में उत्पादन करने में आसानी होगी।