फर्रुखाबाद में हुए खाद सब्सिडी घोटाले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है। सीबीआई ने इस मामले में लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच में एफआईआर दर्ज कर ली है। इस मामले में 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पूरा मामला 1989 से 2000 के बीच का है। 2004 में इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू की कानपुर यूनिट को सौंपी गई थी। फर्रुखाबाद की कंपनी मदन माधव फर्टिलाइजर एंड केमिकल प्राइवेट लिमिटेड पर आरोप है कि उसने 12 सौ करोड़ रुपये की खाद पर किसानों को दी जाने वाली 48.18 लाख रुपये की सब्सिडी हड़प ली। इस मामले में हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी जिसमें कहा गया था कि मामले की जांच कर रही ईओडब्ल्यू ने शिकायतकर्ता को ही बलि का बकरा बना दिया।
मदन माधव फर्टिलाइजर कंपनी के मालिकों को बरी कर दिया गया। नामजद 20 में से 15 को बरी कर दिया गया और पांच के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच करने के आदेश दिए थे और 21 मार्च तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था। इसी को देखते हुए सीबीआई ने पिछले दिनों 17 मार्च को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ये हैं आरोपी
इस मामले में जिन 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है उसमें प्रदीप कुमार अग्रवाल, सुभाष चंद्र गुप्ता, सर्वेश कुमार जैन, शरद खेड़ा, अविनाश कुमार मोदी, चंद्रभान वर्मा, तत्कालीन जिला एग्रीकल्चर अधिकारी फर्रुखाबाद जीसी कटियार, तत्कालीन कृषि निदेशक लखनऊ रतन कुमार सिंह चौहान, कृषि निदेशक इश्वाकु सिंह, संयुक्त कृषि निदेशक वीरपाल सिंह, आदित्य नारायण सिन्हा, अपर निदेशक रंग बहादुर सिंह, गंगाराम, अकाउंट ऑफिसर अभय कुमार सिंह व मदन माधव फार्टिलाइजर एंड केमिकल प्राइवेट लिमिटेड और उसकी पांच सहयोगी कंपनियों को नामजद किया गया है।