किसी नौकरी में आवेदन, परीक्षा या इंटरव्यू के बाद भी जाति प्रमाण पत्र दिया जाए तो उसे स्वीकार किया जाना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति जन्म से आरक्षित वर्ग से हैं तो उसे जारी जाति प्रमाण पत्र केवल इस तथ्य की स्वीकरोक्ति भर है।
सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का यह हवाला देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने इंडियन ओवरसीज बैंक में चयन के बाद ओबीसी सर्टिफिकेट नहीं दे पाने की वजह से चयन खारिज करने के बैंक के निर्णय को बदल दिया है। जस्टिस श्री नारायण शुक्ला और जस्टिस अनंत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि जाति प्रमाण पत्र अंतिम तारीख के बाद भी जमा जा सकता है।
याचिका में शुभम ने बताया कि कई इंटरव्यू के दौरान चुने गए 37 अभ्यर्थी जरूरी दस्तावेज नहीं दे पाए थे, उन्हें बाद में दस्तावेज जमा कराने का मौका दिया गया लेकिन शुभम के मामले में पूरी तरह भेदभाव बरता गया। याचिका के जवाब में बैंकों ने आईबीपीएस के नियमों का हवाला देकर अपने निर्णय को सही बताया।