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अंसल के चेयरमैन समेत छह अफसरों पर करोड़ों रुपये ठगने का आरोप, केस दर्ज

Wed, 31 Oct 2018 01:28 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : डेमो
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प्लॉट देने के नाम पर डेढ़ करोड़ ठगने के आरोप में अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रांस्ट्रक्चर के चेयरमैन समेत छह अफसरों पर हजरतगंज कोतवाली में केस दर्ज हुआ। पीड़ित डॉ. रमेश चंद्र का आरोप है कि कंपनी से उन्होंने तीन पार्क फेसिंग प्लॉट बुक कराए थे। कंपनी ने इस भूखंड को किसी दूसरे को बेच दिया।
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जब कंपनी से इसकी शिकायत की तो टालमटोल का रवैया अख्तियार कर लिया गया। डॉ. रमेश ने 1,50,64,000 रुपये ठगने का आरोप लगाया है। सीओ हजरतगंज अभय कुमार मिश्र के मुताबिक, फैजाबाद रोड स्थित अन्नपूर्णा अपार्टमेंट निवासी डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने 2007 में अंसल गोल्फ सिटी में तीन पार्क फेसिंग प्लॉट डी/3/0104, 0106 और 0198 खरीदा।

यह प्लॉट उन्होंने एक जस्टिस से खरीदा था। जमीन को अपने नाम पर स्थानांतरित कराने के लिए अंसल के अधिकारी गुलशन सागर से बातचीत हुई। उन्होंने स्थानांतरण केलिए 5,88,349 रुपये मांगे। यह रकम उन्होंने चेक से कंपनी के खाते में जमा करा दिया।
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उसी दौरान कंपनी के अन्य अधिकारी राकेश जैन व संदीप सेठी से भी मुलाकात हुई। सभी ने कागजी कार्रवाई को जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। सीओ हजरतगंज के मुताबिक, पीड़ित की तहरीर पर अंसल के चेयरमैन सुशील अंसल, गुलशन सागर, राकेश जैन, संदीप सेठी, मनोज कपूर और बीबी सिंह के खिलाफ केस दर्ज कर पड़ताल शुरू कर दिया गया है। 
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अब तक नहीं मिला प्लॉट

कंपनी के अधिकारी ने कहा था
किसी दूसरे को बेच दिया है भूखंड, अब दूसरा ही मिलेगा

डॉ. रमेश अग्रवाल के मुताबिक, जब जमीन का स्थानांतरण तीन महीने में नहीं हुआ तो उन्होंने अपने रिश्तेदार शिव प्रसाद को अंसल के दिल्ली कार्यालय भेजा। सितंबर 2007 में शिव प्रसाद के  जरिए कंपनी के अधिकारी गुलशन सागर से बात हुई।

उस वक्त वे लंदन में थे। गुलशन सागर ने कुबूल किया वह प्लॉट किसी अन्य को बेच दिया गया है। अब उसके बदले में ही दूसरा प्लॉट ही मिल सकता है। 2008 में कंपनी के चेयरमैन सुशील अंसल से मुलाकात की। उन्होंने गुलशन व गुल्ला को बुलकार मामले को जल्द निपटारे के लिए कहा, लेकिन हुआ कुछ नहीं। सुशील अंसल को पत्र लिखकर धोखाधड़ी के बारे में बताया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। 

रकम डूबने के डर से दूसरी जमीन के लिए राजी हुए, पर वो भी नहीं मिली
डॉ. रमेश अग्रवाल का आरोप है कि रकम डूबने के डर से उन्होंने कंपनी का ऑफर कुबूल कर लिया। 2008 में एग्रीमेंट किया। इसके बाद भी जमीन नहीं मिली। इस बीच 5562 रुपये मेंटनेंस चार्ज मांगा गया। चेयरमैन को मेल से अवगत कराया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जनवरी 2016 में कंपनी के साद वारशी ने सूचना दी कि तकनीकी कारण से प्रोजेक्ट में देरी है। प्लॉट तैयार होगा तो सूचित किया जाएगा। अब तक प्लॉट नहीं मिला। 
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