हवा से बातें करने वाली बुलेट ट्रेन को मूर्त रूप देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए सबसे जरूरी बैलास्ट फ्री ट्रैक (गिट्टी रहित) ट्रैक निर्माण का जिम्मा भी आरडीएसओ के पास है।
पिछले दिनों पिछले दिनों आरडीएसओ ने 160 किलोमीटर की क्षमता वाले बैलास्ट फ्री ट्रैक बनाने में सफलता हासिल की है।
देश में 350 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से बुलेट ट्रेन चलाने के लिए नया कॉरिडोर बनेगा। पटरियों के टूटने और चिटकने जैसी घटनाएं बैलास्ट फ्री ट्रैक पर नहीं होंगी।
रेलवे ने बुलेट ट्रेन के एयरोमॉडलिंग डिजाइन बनाने का जिम्मा पहले ही संयुक्त रूप से आरडीएसओ और खड़गपुर आईआईटी को सौंपा है।
आरडीएसओ के कैरिज व वैगन, लोको और रेल पथ निदेशालय के अधिकारियों ने बुलेट ट्रेन के डिजाइन को लेकर खड़गपुर आईआईटी से संपर्क किया है। वहीं बुलेट ट्रेन का रोलिंग स्टॉक भी अब आरडीएसओ ही तैयार करेगा।
रिसर्च में लगेगा एक से दो वर्ष
आरडीएसओ को बुलेट ट्रेन के लिए बैलास्ट फ्री ट्रैक के रिसर्च पर एक से दो साल तक का समय लग सकता है।
आरडीएसओ का कैरिज व वैगन निदेशालय डिजाइन बनाकर सिम्युलेटर पर प्रारंभिक ट्रायल करेगा। बैलास्ट फ्री ट्रैक पर आने वाले खर्च का ब्यौरा उसके प्रोटोटाइप बनाने के बाद तय होगा।
बुलेट ट्रेन की भावी तैयारियों के लिए रेलवे बोर्ड के आदेश के बाद पिछले दिनों आधुनिक सिग्नल लैब का उदघाटन भी हुआ है।
क्या है बैलास्ट फ्री ट्रैक
एक विशेष तकनीक है, जिसमें पटरियों को सीमेंट से बने रेल पथ से जोड़ा जाता है।
इसकी खासियत यह है कि पटरियों के नीचे पत्थर की कमी के कारण पटरियों को कोई नुकसान नहीं होगा।
यह तकनीक हाईस्पीड और बुलेट ट्रेन की तेज गति को वहन करने की क्षमता रखती है। इसका रखरखाव भी आम रेलखंड की तुलना में बहुत कम होता है।