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बुक्कल नवाब की गिरफ्तारी पर रोक से हाईकोर्ट का इन्कार

Thu, 20 Apr 2017 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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बुक्कल नवाब उर्फ एमए खान - फोटो : amar ujala
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सपा नेता और एमएलएसी बुक्कल नवाब उर्फ एमए खान को राहत न देते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी से रोक लगाने से इन्कार कर दिया है।
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सपा नेता की ओर से बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रार्थना पत्र दायर कर अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर पर किसी भी तरह की कार्रवाई या गिरफ्तार पर रोक लगाने के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस पर अदालत ने उन्हें कोई राहत नहीं दी।

मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल को होगी। बुक्कल नवाब पर गोमती नदी की भूमि पर गलत दावा कर मुआवजा लेने का आरोप है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर इस मामले में उनके खिलाफ वजीरगंज थाने में धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

हाईकोर्ट में दायर एक याचिका में बताया गया था कि बुक्कल नवाब ने जियामऊ व आसपास के गांवों की जमीनों को अपनी बताते हुए नदी के विकास कार्य के लिए भूमि अर्जन के समय करीब आठ करोड़ रुपये मुआवजा जिला प्रशासन से लिया था।
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हाईकोर्ट ने इस मामले की उच्च स्तरीय समिति बनाकर जांच करवाई है। जांच समिति का कहना है कि नवाब ने अपने दावे का आधार 1977 में चिनहट तहसील में हुए एक निर्णय को बताया है, लेकिन इस निर्णय की मूल फाइल तहसील अभिलेखागार में नहीं है।
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जालसाजी से तैयार किए गए दस्तावेज

समिति का कहना है कि उस निर्णय का दस्तावेज जालसाजी से तैयार किया गया और इसी से राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव करवाए गए। समिति के अनुसार 1920 में इसी भूमि का लखनऊ नगर निगम अधिग्रहण कर चुका था।

प्रार्थना पत्र में कहा, बलि का बकरा बनाया जा रहा
बुक्कल नवाब की ओर उनके बेटे द्वारा शपथ पत्र में कहा गया कि हाईकोर्ट ने अपने निर्देशों में बुक्कल नवाब के खिलाफ एफआईआर के लिए नहीं कहा था, बल्कि दोषियों के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए कहा था।

नवाब 63 साल के शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले बुजुर्ग हैं। वह हाई बीपी, हृदय और डायबिटीज के रोगी भी हैं। उनके खिलाफ एफआईआर कल्पनाओं के आधार पर लिख दी गई है, जबकि कोई साक्ष्य नहीं है।

अगर कोई मामला बनता भी है तो उसमें दूसरों को बचाने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है। ऐसे में अंतरिम आदेश जारी करते हुए उनके खिलाफ एफआईआर के तहत की जा रही जांच रोकी जाए और गिरफ्तारी पर भी रोक लगाई जाए। हाईकोर्ट ने प्रार्थना पत्र पर कोई राहत नहीं दी।
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