उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक महीने में ही एक के बाद एक कई ताबड़तोड़ फैसले किए, इनमें कुछ ऐसे रहे, जिनपर सवाल भी उठे।
भाजपा ने चुनाव के दौरान अपने लोक कल्याण संकल्प पत्र अर्थात घोषणा पत्र में लघु एवं सीमांत किसानों के फसली ऋण की कर्जमाफी की बात की थी। यह नहीं कहा था कि सिर्फ एक लाख तक कर्ज माफ करेंगे। जाहिर है कि यह वादा पूरा तो किया गया लेकिन आधा अधूरा।
इसी तरह बूचड़खानों पर एक महीने बाद भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो पाई है। योगी के सत्ता संभालने के बाद बूचड़खानों पर जिस तरह कार्रवाई शुरू हुई। बाजारों में खुले में पशुओं के कटने और मांस के बिकने पर प्रतिबंध का असर दिखा तो लगा कि बदलाव हो रहा है। पर, कुछ दिनों बाद सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौटता जा रहा है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य कह रहे हैं कि यांत्रिक कत्लखानों पर रोक के लिए कानून बनाया जाएगा तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देशों पर अमल की बात कह रहे हैं और सरकार के प्रवक्ता यह स्पष्ट करते घूम रहे हैं कि सिर्फ अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई होगी। सरकार के इस असमंजस ने सूबे में फिर सब कुछ पहले जैसा ही कर दिया है। बाजारों में खुले में पशुओं का कटना शुरू हो गया है और नियमों को ताक पर रखकर गोश्त की बिक्री भी शुरू हो गई है।
कई पर अमल, कुछ पर नजर
सीएम योगी आदित्यनाथ
किसानों की कर्जमाफी ही नहीं बल्कि बकाया बिजली के भुगतान के लिए सरचार्ज माफी का एलान और दस हजार रुपये से ज्यादा के बकाएदार किसानों को किस्तों में भुगतान की सुविधा, बिजली के मुद्दे पर पॉवर ऑफ ऑल के सिलसिले में केंद्र सरकार से समझौता वादों पर अमल का इरादा जता रहा है।
रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच व चीनी मिलों की बिक्री की उच्चस्तरीय जांच तथा एलडीए और आवास विकास परिषदों की सीएजी जांच कराने का ऐलान कर सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर रुख का संदेश दिया है। साथ ही खनन के अवैध व्यापार को रोकने के लिए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर यह साफ किया है कि उसे प्रधानमंत्री की चुनाव के दौरान कही गई यह बात याद है कि यूपी में शुकराना, नजराना, हकराना और जबराना की व्यवस्था बदलनी है।
यही नहीं, प्रदेश सरकार ने अगले वर्ष अक्टूबर से गांवों तक 24 घंटे बिजली के सिलसिले में नींव रखकर भी वादे पूरे करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। हालांकि बिजली आपूर्ति को लेकर जिलों को 24 घंटा, तहसीलों को 20 और गांवों को 18 घंटे बिजली देने का ऐलान पुराना फैसला ही है। फिर भी कुछ फैसले सरकार को सवालों में खड़ा कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने चुनाव के दौरान सूबे के थानों को समाजवादी पार्टी के लोगों का अड्डा बताया था। योगी सरकार ने भी सत्ता की कमान संभालते हुए इनकी छवि को बदलने का इरादा जताया था पर, इस मुद्दे पर भी अभी तक कुछ जमीन पर नहीं दिखाई दिया है। उम्मीद तो थी कि नई सरकार में कानून-व्यवस्था पूरी तरह राह पर आ जाएगी।