बसपा सुप्रीमो मायावती ने राजस्व मंत्री शिवपाल यादव की अपील के बाद किसानों की मदद को लेकर सकारात्मक रुख तो दिखाया लेकिन इसके सियासी नफा-नुकसान पर भी पूरा ध्यान दिया है।
उन्होंने पार्टी विधायकों, विधान परिषद सदस्यों व राज्यसभा सांसदों से एक-एक महीने का वेतन किसानों की मदद में देने की अपील तो की लेकिन यह धन सीएम राहत फंड में देने से मना कर दिया। उन्होंने इसकी जगह अपने-अपने क्षेत्र के पीड़ित किसानों में सहायता राशि बांटने का निर्देश दिया है।
मायावती ने इस फैसले का ऐलान करते हुए राज्य व केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा किया है। कहा कि बेमौसम बारिश व ओलावृष्टि से किसानों का हाल खराब है। हर ओर से किसानों की सदमे से मौत व आत्महत्या की खबरें आ रही हैं।
इसके बावजूद केंद्र व राज्य सरकार केवल खानापूरी ही करती दिख रही है। इसी वजह से विधायकों व सांसदों से सरकारी माध्यम के बजाय अपने-अपने क्षेत्रों के गरीब व कर्ज के बोझ से दबे किसानों के बीच पहुंचकर स्वयं वेतन की राशि देने को कहा है। इससे किसानों को तत्काल राहत मिल सकेगी।
सीएम राहत कोष में पैसा न देना अच्छा फैसला
बसपा के एक वरिष्ठ विधायक कहते हैं कि सीएम राहत कोष से जो भी मदद किसानों में जाएगी, सपा के लोग उसका पूरा श्रेय लेने की कोशिश करेंगे। बसपा विधायक यदि इस कोष में अपना वेतन देते तो उसकी जानकारी किसी को न होती। ऐसे में पार्टी मुखिया का फैसला बहुत अच्छा है।
कम से कम हम जिसकी भी मदद करेंगे, उसे पता तो चलेगा। हालांकि वह यह भी जोड़ते हैं कि यदि यही ऐलान मायावती ने पिछले दिनों अपनी प्रेसवार्ता में कर दिया होता तो बढ़त बना लेतीं।
पीएम-सीएम की विदेश यात्रा पर निशाना
मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की विदेश यात्रा पर भी सवाल खड़ा किए। कहा, विचित्र बात है कि किसान मर रहे हैं और जीवन से निराश होकर आत्महत्या तक कर रहे हैं लेकिन प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री विदेश में सैर-सपाटा कर रहे हैं।
किसान बीमा योजना की भी पोल पूरी तरह से खुल गई है। फसल बीमा को ख़ूब प्रचारित किया जाता है लेकिन पीड़ित किसानों को मुआवजा ही नहीं मिल पाता।
देशव्यापी आंदोलन में नहीं कोई बदलाव
मायावती ने कहा,पीड़ित किसानों को समुचित राहत दिलाने की मांग को लेकर हमारा देशव्यापी आंदोलन पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगा। प्रथम चरण में यूपी के सभी जिला मुख्यालयों पर 27 अप्रैल को विशाल धरना-प्रदर्शन होगा।
पीएम को एनआरआई की चिंता ज्यादा
बसपा प्रमुख ने कहा, प्रधानमंत्री देश के लाखों किसान परिवारों को राहत देकर अपना ‘राजधर्म’ निभाने के बजाय सांसदों को जनता के बीच अपनी विदेश यात्रा की उपलब्धियां बताने को कह रहे हैं। उन्हें शायद यह नहीं पता कि भूखे पेट कुछ भी अच्छा नहीं लगता।
भाजपा के सांसद अगर हिम्मत कर अपने-अपने क्षेत्रों में चले भी जाएंगे तो उन्हें किसानों के सवालों का जवाब देना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री को देश के गरीबों व बेरोजगारों की चिंता कम, संपन्न व धनवान अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) की चिंता ज़्यादा है।