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'पलायनवादी हैं राजनाथ, लखनऊ भी नहीं टिकेंगे'

Mon, 14 Apr 2014 10:50 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, लखनऊ
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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से कैसे मुकाबला करेंगे। सपा और कांग्रेस भी टक्कर में है। ऐसे में अपने लिए क्या संभावनाएं देखते हैं?
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-इन प्रत्याशियों से मेरा कोई मुकाबला नहीं है। रही बात राजनाथ की तो वह जहां से चुनाव लड़ते हैं, वहां कभी लौटकर दोबारा जाते ही नहीं। मैंने लखनऊ में विकास के सर्वाधिक काम कराए, जनता के हर दुख-दर्द में शामिल रहा, गलियों में घूमा। इसलिए मेरे लिए अपार सम्भावनाएं हैं।

मंत्री रहते हुए विधायकी हार गए, अब सांसदी के लिए मैदान में हैं। कैसे लड़ेंगे?
-2007 में महोना से चुनाव लड़ा था, जिसमें सात लाख मतों में से 54 हजार वोट पाकर एमएलए बना। फिर 2012 में यह सीट बंटकर बीकेटी बन गई। जहां करीब सवा तीन लाख मतों में से 78000 वोट मुझे मिले।
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महज 1800 मतों से चुनाव हार था। बावजूद इसके मेरा वोट प्रतिशत बढ़ता ही रहा है। इस बार भी ऐसा ही होगा।

बसपा चट्टान की तरह खड़ी है

नामांकन तक में कोई बड़ा नेता नहीं आया, ऐसा तो नहीं कि बसपा ने आप को अकेला छोड़ दिया है?
-नहीं ऐसा बिलकुल नहीं है। बसपा चट्टान की तरह खड़ी है। जहां नेता सिर्फ एक है, बाकी सब कार्यकर्ता हैं।

यहां दिखावे के लिए नहीं, जिम्मेदारी से काम होता है। रही बात नामांकन में शामिल होने वाले नेताओं की, तो नामांकन वाले दिन गोपाल नारायण मिश्र, जिलाध्यक्ष नवीन चंद्र, समेत प्रमुख समन्वयक शामिल थे।
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लखनऊ का दूंगा विकास की रफ्तार

आप नगर विकास मंत्री थे, लेकिन शहर को कुछ दे नहीं पाए। आगे के लिए आपका एजेंडा क्या है?
-यह सच नहीं है। नगर विकास मंत्री के तौर पर गोमती को स्वच्छ, सुंदर व निर्मल बनाने का काम किया। एसटीपी बनवाए और उन्हें चालू करवाया।

गोमती में गिरने वाले नाले बंद करवाए। जल निगम में अभियान चलाकर पानी की समस्या दूर करवाई। गहरी सीवर लाइन से शहर को जोड़ा। इसकेअलावा अभी भी लखनऊ का समग्र विकास करने का एजेंडा बनाया हुआ है।

नवाबों की नगरी लखनऊ आपको सांसदी का ताज क्यों पहनाए?
-चूंकि, मैं लखनऊ के चप्पे-चप्पे से वाकिफ हूं। इसलिए योजनाएं बनाकर उन्हें लागू करवाने में दिक्कत नहीं होगी। दूसरे, लखनऊ की जनता यह देखे कि उनके बीच सबसे ज्यादा कौन रहा है। आसानी से उपलब्ध रहूंगा और जनता की समस्याओं का त्वरित निस्तारण करवाऊंगा।
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