मायावती ने कहा, भाजपा वाले पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जीते जी कभी उनके बताए रास्ते पर नहीं चले। यदि चलते तो राजधर्म के नाम पर धार्मिक उन्माद, गोरक्षा के नाम पर हिंसा या मॉब लिंचिंग नहीं होती या फिर जनविरोधी आर्थिक नीतियां लागू न करते। जातिवादी व कट्टरवादी तत्वों को प्रश्रय न देते। कालाधन व भ्रष्टाचार खत्म करने की आड़ में नोटबंदी व जीएसटी को अपरिपक्व तरीके से लागू नहीं करते। वास्तव में ये लोग अटलजी की मृत्यु को भी राजनीतिक तौर पर भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे।
मायावती बोलीं- एससी-एसटी एक्ट को संविधान की भावना के अनुरूप लागू करने पर उसके दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं है। यदि राज्य सरकारें इस एक्ट का इस्तेमाल यूपी में बसपा शासनकाल की तरह करें तो किसी भी कीमत पर इसका दुरुपयोग नहीं हो सकता। जिस तरह भाजपा सरकार को देश के संवैधानिक नाम भारत के स्थान पर हिंदुस्तान कहने में कोई एतराज नहीं है, उसी तरह अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों को दलित कहने पर कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। यदि दलित शब्द पर आपत्ति है तो हिंदुस्तान के बजाय केवल भारत कहने का सरकारी आदेश जारी करना चाहिए।
मायावती ने विजय माल्या व नीरव मोदी के बहाने भाजपा व कांग्रेस दोनों को निशाने पर लिया। कहा, इन्हें विदेश भगाने में कांग्रेस व मौजूदा भाजपा सरकार बराबर की जिम्मेदार है। भाजपा आज पेट्रोल, डीजल की महंगाई, 2014 के चुनाव में वादाखिलाफी के साथ राफेल सौदे का संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रही है। कहा, भाजपा ने यदि उनके खिलाफ विद्वेषपूर्ण कार्रवाई न की होती तो वह लखनऊ व दिल्ली में आलीशान मकान न बना पातीं। लोगों ने उस समय जांच के खिलाफ आक्रोश में निजी गिफ्ट देकर मेरी मदद की। फिर दोनों जगह मकान बनवा पाई। उन्होंने इसके लिए अपने समर्थकों के साथ भाजपा को भी शुक्रिया कहा।