फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

50 एकड़ जमीन में बनेगी बीएस-4 लैब, केजीएमयू की बायोसेफ्टी लेवल-4 लैब के लिए रहमानखेड़ा फॉर्म में जमीन मिलने को सैद्धांतिक सहमति

विज्ञापन
विज्ञापन
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बनने वाली बायोसेफ्टी लेवल-4 (बीएस-4) का निर्माण हरदोई रोड स्थित रहमानखेड़ा फॉर्म की जमीन पर होगा। इसके लिए शासन से सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। शासन ने प्रदेश की पहली बीएस-4 लैब के लिए 50 एकड़ जमीन देने की बात कही है। साथ ही लैब का डीपीआर बनाने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है।
विज्ञापन

कोरोना की भयावहता तथा भविष्य में ऐसी अन्य बीमारियों की आशंका को देखते हुए प्रदेश सरकार ने बीएस-4 लैब स्थापित करने का फैसला किया है। फिलहाल इस तरह की लैब सिर्फ पुणे में ही है। पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में देशभर से सैंपल भेजे जाते हैं। इसमें वक्त और श्रम दोनों ही ज्यादा लगता है। इसे देखते हुए अब बीएस-4 लैब का निर्माण लखनऊ में किया जा रहा है। केजीएमयू को इस लैब स्थापना की जिम्मेदारी दी गई है। ज्यादा जगह और सुरक्षा की दृष्टि से यह लैब शहर से बाहर स्थापित की जानी है। इसे देखते हुए केजीएमयू प्रशासन ने शासन से जमीन देने का अनुरोध किया। लैब के लिए रहमानखेड़ा फॉर्म की जमीन देने के लिए शासन ने अपनी सैद्धांतिक सहमति दे दी है। लैब निर्माण के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करने के लिए एजेंसी की तलाश की जा रही है। इसकी टेंडर प्रक्रिया भी शुरू होने वाली है।
जानिए क्या है बीएस-4 लैब
खतरनाक रोगाणु, वायरस और बैक्टीरिया को प्रयोगशाला के भीतर रखने के दौरान बरते जाने वाले सावधानी के स्तर को बायोसेफ्टी लेवल के जरिये तय किया जाता है। लेवल-1 लैब में ऐसे रोगजनक होते हैं, जिनसे बहुत कम खतरा होता है। इसलिए बरती जाने वाली सावधानियों का स्तर थोड़ा कम होता है। लेवल-2 में इस स्तर पर बायो सेफ्टी लेवल-1 में उपयोग की जाने वाली सभी सावधानियों का पालन तो किया ही जाता है, साथ ही कुछ अतिरिक्त सावधानियां भी बरती जाती हैं। इस लैब में ऐसे रोगाणु होते हैं जिनसे बीमारी हो सकती है, लेकिन उनका इलाज खोजा जा चुका है। लेवल-3 में श्वसन मार्ग के माध्यम से गंभीर और घातक रोगाणु होते हैं। इसलिए बेहद सावधानी की जरूरत होती है। बायो सेफ्टी लेवल-4 जैव सुरक्षा सावधानियों का उच्चतम स्तर है। ऐसी लैब बेहद ही संवेदनशील होती हैं। यहां दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा रोगाणुओं को रखा जाता है और उन पर लगातार प्रयोग भी चलता रहता है। ये रोगाणु प्रयोगशाला के भीतर हवा के जरिए फैल सकते हैं और इंसानों में घातक बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इसके लिए यहां बहुत ज्यादा सावधानी की जरूरत है।
विज्ञापन

केजीएमयू प्रशासन ने शासन से बीएस-4 लैब के लिए जमीन देने का अनुरोध किया है। इस जवाब में रहमानखेड़ा फॉर्म में जमीन उपलब्ध कराने के लिए सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। अन्य प्रक्रिया पूरी की जा रही हैं। इसके बाद आगे की कार्रवाई शुरू होगी।
विज्ञापन

- आशुतोष कुमार द्विवेदी, कुलसचिव, केजीएमयू
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें