ब्लड कैंसर से जूझ रहे मरीजों के लिए किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) उम्मीद की किरण लेकर आया है।
यहां के क्लीनिकल हीमेटोलॉजी विभाग में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इस नई सुविधा के लिए कवायद भी शुरू हो गई।
शताब्दी अस्पताल के फेज-टू में बन रहे भवन में इस विभाग को विकसित किया जाएगा।
पीजीआई में भी सुविधा, पर काम का नहीं
अभी तक बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा सिर्फ एसजीपीजीआई में ही है, लेकिन वहां से भी मरीजों को तमिलनाडु के वेल्लोर स्थित क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
केजीएमयू में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने से मरीजों को तमिलनाडु की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगा। साथ ही पहले की तुलना में ट्रांसप्लांट भी कुछ सस्ता होगा।
एक साल में मिलेगी सुविधा
केजीएमयू में एक साल के अंदर बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हो जाने की उम्मीद है। इस अतिविशिष्ट सुविधा को शुरू करने की कवायद तेज हो गई है।
शताब्दी अस्पताल के फेज टू में बन रहे भवन के चतुर्थ तल पर क्लीनिकल हीमेटोलॉजी विभाग को शिफ्ट किया जाएगा।
पूरी तरह से विभाग के लिए ही डेडीकेटेड इस फ्लोर पर 60 बेड होंगे। इसमें जनरल, प्राइवेट और आईसीयू के बेड भी शामिल हैं।
शुरू हो गई नियुक्ति प्रक्रिया
विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी कर दिया गया है। दो विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
इसके अलावा प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति की जा रही है। वर्तमान में क्लीनिकल हीमेटोलॉजी विभाग सिर्फ इलाज की सुविधा उपलब्ध करा रहा है।
केजीएमयू के क्लीनिकल हीमेटोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एके त्रिपाठी कहते हैं कि विभाग के विस्तार की तैयारी चल रही है।
इसमें बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा भी होगी। शताब्दी फेज-टू के भवन में विभाग का विस्तार किया जा रहा है। वहां रक्त से संबंधित सभी बीमारियों के इलाज की सुविधा उपलब्ध करायी जाएगी। इसके लिए एक साल का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
नहीं जाना पड़ेगा दक्षिण भारत
केजीएमयू में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू होने के बाद प्रदेश के मरीजों को दक्षिण भारत के अस्पतालों में इलाज कराने नहीं जाना पड़ेगा।
अभी तक संजय गांधी पीजीआई में ही हीमेटोलॉजी विभाग है। 1999 में एसजीपीजीआई में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरू हुई थी लेकिन वहां से भी मरीजों को सीएमसी वेल्लोर ही रेफर कर दिया जाता है।
जहां 15 से 20 लाख रुपये बोन मैरो ट्रांसप्लांट का खर्च आता है। केजीएमयू ये सुविधा शुरू होने से ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों को सैकड़ों किलोमीटर दूर जाने से बचत हो जाएगी और लाखों रुपये का खर्च भी बचेगा।
एसजीपीजीआई में हाल ये है कि कीमोथेरेपी के लिए भी मरीजों को 10 से 12 दिन की वेटिंग है।