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उदारवादी चेहरों को साथ लाकर मुसलमानों को साधने में जुटी भाजपा, दिख रहा है कोशिश का असर

Fri, 01 Nov 2019 04:24 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी/अमर उजाला, लखनऊ
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आरिफ मोहम्मद खान व अम्मार रिजवी। - फोटो : amar ujala
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भाजपा अब उदार माने जाने वाले मुस्लिम नेताओं को अपने पाले में खड़ा करके विरोधी दलों को झटका देने की मुहिम में जुटी है। इसके पीछे न सिर्फ मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण रोककर विरोध में पड़ने वाले मतों की ताकत को कमजोर करने की रणनीति है, बल्कि प्रदेश में करीब 19 प्रतिशत आबादी वाले इस तबके के बड़े हिस्से को साथ जोड़कर पार्टी के लिए भविष्य की सियासी राह को और आसान बनाने का सपना भी है।

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आरिफ मोहम्मद खान व डॉ. अम्मार रिजवी जैसे उदारवादी चेहरों को आगे करके भाजपा मुसलमानों के  बीच संदेश देने की कोशिश कर रही है कि वह मुस्लिम विरोधी नहीं है। इस मुहिम का सियासी नफा-नुकसान तो वक्त ही बताएगा, लेकिन इससे उन सियासी दलों में छटपटाहट जरूर है जो भाजपा का खौफ दिखाकर मुस्लिम मतों का ध्रुवीकरण कराते आए हैं।

केंद्र ने प्रदेश के उदारवादी मुस्लिम चेहरे आरिफ मोहम्मद खान को केरल का राज्यपाल बनाया है। हाल ही कांग्रेस के कद्दावर नेता डॉ. अम्मार रिजवी ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। अम्मार का भाजपा में शामिल होना सियासी तौर पर बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस में भी उनकी पहचान बड़े मुस्लिम चेहरे के रूप में रही है। केंद्र व प्रदेश में भाजपा के सत्ता में आने के बाद जिलों में स्थानीय स्तर पर पहचान रखने वाले मुस्लिम नेताओं के भाजपा में शामिल होने का सिलसिला भी बदस्तूर जारी है।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा काफी पहले से कोशिश कर रहे हैं कि उनकी छवि हिंदुत्ववादी तो रहे, लेकिन मुस्लिम विरोधी न बनने पाए। पहले भी एजाज रिजवी, उनकी पुत्री डॉ. शीमा रिजवी, तनवीर हैदर उस्मानी, डॉ. मुख्तार अब्बास नकवी और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष गैरुल हसन रिजवी जैसे चेहरे प्रदेश भाजपा में मुस्लिमों की नुमाइंदगी करते रहे हैं।

भाजपा मुसलमानों की नहीं बल्कि कुरीतियों की विरोधी, ये संदेश देने का प्रयास

भाजपा की केंद्रीय राजनीति में सक्रियता के बाद पीएम मोदी ने इस दिशा में प्रयास शुरू किए। उन्होंने न सिर्फ इस वर्ग के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू कीं, बल्कि तीन तलाक को मुद्दा बनाकर मुस्लिम महिलाओं की दुखती रग पर हाथ भी रखा।

शाहबानो केस में सबसे पहले आवाज उठाने वाले आरिफ मोहम्मद खान को तीन तलाक कानून बनाने के बाद केरल का राज्यपाल बनाकर भाजपा ने मुसलमानों के बीच संदेश देने की कोशिश की कि वह मुस्लिम समाज नहीं, बल्कि उनके बीच व्याप्त कुरीतियों की विरोधी हैं। पार्टी के पास एक भी मुस्लिम विधायक न होते हुए भी योगी सरकार के गठन के वक्त मोहसिन रजा को मंत्री बनाकर भी भाजपा ने मुस्लिमों के सरोकारों की चिंता का संदेश दिया।

भरोसा बढ़ाने की मुहिम
मुसलमानों के बीच भरोसा पैदा करने की भाजपा-आरएसएस की कोशिश नई नहीं है। यह सिलसिला ढाई दशक से चल रहा है। संघ प्रमुख मोहन भागवत लगातार कहते रहे हैं, ‘संघ मुसलमानों का दुश्मन नहीं है।’ संघ परिवार की मुसलमानों से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश 24 दिसंबर 2002 को दिल्ली स्थित बापू धाम से शुरू हुई थी। वरिष्ठ प्रचारक इंद्रेश को इस अभियान की जिम्मेदारी सौंपते हुए ‘राष्ट्रीय मुस्लिम मंच’ नाम का संगठन बना। इंद्रेश ने जगह-जगह जिस तरह मुस्लिम चेहरे संघ परिवार के साथ खड़े किए हैं, उसका लाभ भी भाजपा को मिल रहा है।

इसी साल 20 जून को इंद्रेश देवबंद के दारुल उलूम पहुंचे तो वहां मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी बनारसी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। अगस्त में जमीयत उलमा-ए-हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी की भी आरएसएस प्रमुख से मुलाकात हुई थी। इससे पहले 2009 में तत्कालीन संघ प्रमुख कुप्पहल्ली सीतारमैया सुदर्शन ने भी शिया धर्मगुरु हमीदुल हसन और मौलाना कल्बे सादिक के यहां जाकर संघ परिवार को लेकर मुसलमानों के बीच बनी धारणा तोड़ने का आग्रह किया था।

इसलिए मुस्लिम लामबंदी तोड़ना चाहती है भाजपा

प्रदेश में विधानसभा की करीब 70 सीटों पर मुसलमानों की आबादी 20 प्रतिशत है। 1990 के दशक में अयोध्या आंदोलन के बाद मुस्लिमों का सियासी ध्रुवीकरण सपा के साथ हो गया। फिर मुसलमान भाजपा को हराने के एजेंडे पर वोट देने लगे।

भाजपा विरोधी दल मुसलमानों के साथ यादव, अहीर, यदुवंशी और जाटव वोटों के साथ लामबंदी कर चुनाव लड़ते रहे हैं। मुसलमानों का करीब 20 प्रतिशत मत एकमुश्त मिलने से भाजपा विरोधी दलों का वोट का गणित ठीक हो जाता है। भाजपा मुस्लिम मतों में सेंधमारी कर इसी लामबंदी को तोड़ने में जुटी है।

‘मुसलमान वोट की गोट नहीं’
इस पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह का कहना है कि भाजपा मुसलमानों को वोट की गोट नहीं, सिर्फ इंसान मानती है। उनकी समस्याओं के समाधान और जरूरतों की पूर्ति का ध्यान रख रही है। उन्हें बिना भेदभाव सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया है।

प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के तहत इनकी सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक तरक्की और मुस्लिम महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए काम किया। मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक से निजात दिलाने को कानून बनाया गया। इन कामों से भाजपा मुस्लिम समाज के बीच भरोसा भरने में कामयाबी हुई है।

सांप्रदायिकता की राजनीति खत्म करने की कोशिश

काशी हिंदू विवि, वाराणसी के राजनीति शास्त्र विभाग के अध्यक्ष प्रो. कौशल किशोर का कहना है कि मुस्लिम समाज में दो तरह की धाराएं हैं। एक उदारवादी और दूसरा कट्टरपंथी। भाजपा उदारवादी चेहरों को साथ लेकर मुसलमानों के बीच अपना भी प्रतिनिधित्व होने का संदेश देने की कोशिश कर रही है।

भाजपा की रणनीति सर्व समावेशी और सर्व स्वीकार्य राजनीतिक दल बनने की है, जिससे उसे लंबे समय तक काम करने का मौका मिले। यह तभी होगा जब सबका वोट मिले। इसीलिए भाजपा एक तरफ राष्ट्रवाद की नीति पर चल रही है तो दूसरी तरफ मुसलमानों के बीच भी पकड़ बढ़ाने का प्रयास कर रही है।

प्रदेश में मुस्लिमों की स्थिति
19.26 फीसदी मुस्लिम आबादी, पश्चिमी यूपी में 24.44 प्रतिशत।
12 जिलों में एक तिहाई मुस्लिम।
13 जिलों में 20 से 33 फीसदी मुस्लिम।

12 जिलों में 15 से 20 फीसदी मुस्लिम।
21 जिलों में 10 से 15 फीसदी मुस्लिम।
17 जिलों में 10 फीसदी से कम मुस्लिम
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रंग ला रही है भाजपा की कोशिश, पहले की अपेक्षा कम हुआ है मुसलमानों का विरोध

गोरखपुर विवि में कला संकाय के अध्यक्ष प्रो. एसपीएम त्रिपाठी दावा करते हैं कि भाजपा की कोशिश रंग ला रही है। मुसलमानों के बीच उसका विरोध पहले की अपेक्षा कम हुआ है। तीन तलाक को गैरकानूनी बनाकर भाजपा ने मुस्लिम महिलाओं का 35 फीसदी वोट अपनी तरफ मोड़ा।

भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैदर अब्बास चांद भी कहते हैं कि तीन तलाक ने सिर्फ मुस्लिम महिलाओं का ही नहीं, बल्कि उनके भाई, पिता और परिवार वालों का भी भाजपा को लेकर नजरिया बदला है। भाजपा के साथ जुड़े मुस्लिम सदस्यों की संख्या आज 1.32 लाख से बढ़कर करीब चार लाख पहुंच गई है।
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