भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं ने सोमवार को सीएम अखिलेश यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। करीब हजारों की संख्या में भाजपा की महिला कार्यकर्ता भाजपा कार्यालय से जुलूस बनाकर एनेक्सी के घेराव के लिए निकल पड़ी।
हालांकि उन्होंने इसका ऐलान 30 मई को ही कर दिया था इसलिए पुलिस उन्हें रोकने के लिए पूरी तरह तैयार थी। ज्यों ही कार्यकर्ताओं का जुलूस बापू भवन पहुंचा, पुलिस उनके ऊपर पानी की बौछार करने लगी।
बावजूद इसके महिलाओं ने प्रदर्शन जारी रखा और एनेक्सी घेर लिया। यह प्रदर्शन प्रदेश में महिला उत्पीड़न की लगातार बढ़ रही घटनाओं के विरोध में है।
सूत्रों के मुताबिक महिला मोर्चा का एक प्रतिनिधि मंडल मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी मांग रख सकता है।
बी.एल जोशी से मिले अखिलेश
बदायूं में दो बहनों के गैंगरेप और हत्या की दर्दनाक घटना से पूरे प्रदेश में सपा सरकार की फजीहत हो रही है।
राज्यपाल बी.एल जोशी ने आज इस घटना पर स्वत: संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बुलाया।
श्री जोशी ने मुख्यमंत्री से पूरा ब्यौरा लिया और घटना पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने प्रदेश में लचर होती कानून व्यवस्था पर भी मुख्यमंत्री से बात की।
बताते चलें कि दिन-ब-दिन अपराध की घटनाओं में हो रही बढोतरी की वजह से अखिलेश सरकार बुरी तरह घिर गई है।
कमेटी ने सौंपी अपनी रिपोर्ट
वहीं, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने रविवार को आरोप लगाया कि बदायूं, आजमगढ़ और इटावा में बलात्कार के आरोपियों को समाजवादी पार्टी का संरक्षण है।
आपराधिक षडयंत्र में पुलिस भी शामिल रही। उन्होंने इन मामलों में चौकी इंचार्ज से आईजी तक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने तथा पीड़ितों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा और सुरक्षा देने की मांग की।
भाजपा मुख्यालय में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी ने बताया कि पार्टी की ओर से बदायूं, आजमगढ़ व इटावा में बलात्कार की घटनाओं की जांच के लिए बनाई गई कमेटियों ने अपनी रिपोर्ट दे दी है।
पुलिस की रही मिलीभगत
तीनों ही घटनाओं में पीड़ित महिलाएं कमजोर वर्ग की, नाबालिग और अतिदलित या अतिपिछडे़ वर्ग से संबंधित है।
लड़कियों को घर से निकलते ही उठाकर ले जाया गया। तीनों मामलों में पुलिस को समय से घटना की सूचना मिल गई थी।
पुलिस षड़यंत्र में शामिल रही। बदायूं में तो अपराधियों से साठगांठ कर भगाने में भी पुलिस शामिल रही।
उन्होंने आरोप लगाया कि तीनों स्थानों पर बलात्कारियों को सत्ताधारी सपा का संरक्षण प्राप्त है या अपराधी स्वयं सपा कार्यकर्ता हैं। उन्होंने प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी पर भी राजनीतिक दबाव में कर्तव्य पालन से चूक बरतने का आरोप लगाया।
उन्होंने मांग की कि असंवेदनशील और गैर जिम्मेदाराना बयान के लिए आईजी एसटीएफ के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।