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आराम नहीं कर रहे भाजपाई, लगातार यूपी को मथने की बना रहे योजना

Sat, 01 Apr 2017 02:08 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह
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यूपी में तीन चौथाई बहुमत से सत्ता पाने के बाद भाजपा अब वोटों को सुरक्षित रखने की कोशिश में जुट गई है। इसके लिए आयोग बनाने से लेकर अभियान तक पर काम शुरू किया गया है।
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हालांकि पिछड़े वर्ग के कुछ लोगों को सरकार की तरफ से शुरू की गई कोशिशें नाकाफी नजर आती हैं, लेकिन पार्टी के रणनीतिकारों ने जिस तरह अभियान चलाकर लोगों को बताने व समझाने की योजना बनाई है, उसके पीछे उनकी कोशिश दलित व पिछडे़ वोट की भाजपा के साथ लामबंदी ही दिखाई देती है।

दरअसल, भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पहले लोकसभा और अब प्रदेश विधानसभा के चुनाव में मिली बड़ी जीत के पीछे अगड़ों के साथ पिछड़ों व दलितों के वोटों की लामबंदी ही मुख्य वजह रही है। रणनीतिकार अब इस समीकरण को स्थायी रूप से बनाए रखना चाहते हैं।
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केंद्र सरकार के काम और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला तथा पार्टी के स्थापना दिवस से डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती तक चलने वाले कार्यक्रम और पार्टी के संस्थापक सदस्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जन्मशताब्दी के मद्देनजर चलने वाला अभियान पार्टी की इसी कोशिश का हिस्सा नजर आते हैं।

अगड़ों को भी पूरा सम्मान देने की कोशिश

जहां तक बात अगड़ों को साधने की है तो पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का मानना है कि पिछड़े व दलित वर्ग के आरक्षण का दुरुपयोग न किया जाए तो अगड़ों को भी हर जगह स्वाभाविक रूप से सम्मानजनक अवसर मिल सकते हैं।

पार्टी की कोशिश यही सुनिश्चित करने की है कि आरक्षण की अधिकारी जातियों को इसका लाभ मिले तो अगड़ों को भी बिना पक्षपात के आगे बढ़ने के अवसर प्राप्त हों। लोगों को यह समझाना भी अभियान का हिस्सा होगा।

ये काम भी है इसी कोशिश की बानगी
रणनीतिकारों की काफी पहले से यह कोशिश रही है कि पिछड़ों व दलितों के लिए दिए जा रहे आरक्षण का लाभ इन वर्गों की सभी जातियों को उनकी आबादी के अनुपात में बांट दिया जाए।

इसके पीछे उनकी रणनीति गैर यादव पिछड़ों व गैर जाटव दलित को जोड़कर राजनीतिक लिहाज से अपने समीकरण मजबूत बनाने की रही है। केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग की जगह सामाजिक एवं शैक्षिक राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग नाम रखकर और इसे संवैधानिक दर्जा देने का फैसला भी इसी कोशिश का हिस्सा नजर आता है।

सूबे में राजनाथ सिंह के नेतृत्व में बनी राज्य सरकार ने 2000-2001 में भी इस समीकरण को साधने के लिए आगे कदम बढ़ाए थे, पर न्यायालय में याचिका दायर हो जाने के कारण इसका पूरा लाभ संबंधित वर्गों को नहीं मिल पाया।

इस तरह किए जाएंगे प्रयास

भाजपा ने अब इस आयोग के जरिए उसी कोशिश को आगे बढ़ाया है। इसीलिए प्रदेश में चलने वाले पार्टी के जनसंपर्क व जनसंवाद अभियान में केंद्र सरकार द्वारा पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने के काम के प्रचार-प्रसार को मुख्य रूप से शामिल किया गया है।

पार्टी के लोग पिछड़ी जातियों के बीच जाकर उन्हें बताएंगे कि उनके वोट से जीतने वाले राजनीतिक दलों की चाहे अभी तक केंद्र में सरकार रही हो या प्रदेश में, उसने कभी उनके लिए ईमानदारी से नहीं सोचा। इसीलिए पिछड़ों को आरक्षण का ठीक से लाभ नहीं मिल पाया।

पार्टी के महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते भी हैं कि काका कालेकर कमीशन 1950 और मंडल आयोग 1979 की रिपोर्ट के बाद भी तत्कालीन सरकारों ने इनका कोई संज्ञान नहीं लिया। इस वजह से इन वर्गों के लोगों को न तो न्याय मिल सका और न आगे बढ़ने के लिए पूरे अवसर ही मिल पाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने आयोग को संवैधानिक दर्जा देने का फैसला कर वर्षों से इन वर्गों के साथ हो रहे अन्याय को खत्म करने की कोशिश की है। पाठक की बातों से जाहिर है कि भाजपा की कोशिश पिछड़े वर्गों के दिमाग में यह बात बैठाने की है कि भाजपा ही उनकी सच्ची हितैषी है।

दलितों के बीच इस तरह कोशिश

भाजपा ने लोकसभा चुनाव में प्रदेश में सुरक्षित सभी 17 सीटों पर जीत हासिल की थी तो इस बार विधानसभा चुनाव में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 86 सीटों में भाजपा ने गठबंधन में शामिल अपना दल और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के साथ 76 सीटें जीती हैं।

लगातार दो चुनाव में सुरक्षित सीटों पर कब्जे ने भाजपा के रणनीतिकारों का हौसला और विश्वास बढ़ाया है। उन्हें यह भरोसा हो चला है कि केंद्र सरकार द्वारा अनुसूचित जातियों के लिए किए गए काम और इस वर्ग के महापुरुषों के सम्मान ने इस समाज के बीच भाजपा की स्वीकार्यता बढ़ा दी है।

शायद इसीलिए सूबे में सत्ता पाने के बाद ही उन्होंने इस वोट को पार्टी के साथ जोड़े रखने पर ध्यान केंद्रित किया है। यह बात डॉ. अंबेडकर की जयंती पर पार्टी की ओर से दलित बस्तियों में होने वाले  कार्यक्रमों, समाज के लिए काम करने वाले दलित वर्ग के बुजुर्गों और पार्टी के दलित वर्ग के नेताओं के सम्मान कार्यक्रमों के आयोजन के फैसलों से भी पता चलती है।
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दलितों के लिए किए गए काम को बताएगी भाजपा

अभियान के दौरान भाजपा के लोग दलित वर्ग के लोगों को बताएंगे कि भाजपा की केंद्र सरकार ने डॉ. अंबेडकर को भारतरत्न दिया और उनसे जुड़े स्थलों के विकास का कार्यक्रम बनाया।

उन्हें यह भी समझाएंगे कि दलित युवकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने क्या-क्या उपाय किए, पर प्रदेश में अब तक गैर भाजपा सरकार होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल सका। अब उन्हें इसका वास्तविक लाभ मिलेगा।
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