भाजपा के बड़बोले नेताओं के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। पार्टी की तरफ से चलाए जा रहे महासंपर्क अभियान के दौरान व्यक्तिगत व बूथ संपर्क कार्यक्रम उनकी पोल खोल सकता है।
खास तौर से ऐसे नेताओं की, जो बातें तो बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन जमीन पर काम नहीं करते। सदस्यता अभियान के दौरान भी घर पर ही बैठे रहे या फिर अपने खाते में दूसरे कार्यकर्ताओं की कॉल को जोड़कर बहुत ज्यादा संख्या में मिस्ड कॉल कराके वाहवाही लूटने की कोशिश की है।
दरअसल, व्यक्तिगत व बूथ संपर्क अभियान के दौरान अब इन नेताओं को अपने कराई गई मिस्ड कॉल के आधार पर लोगों से व्यक्तिगत तौर पर मिलना है। साथ ही उनका फॉर्म भरने के अलावा अपने मोबाइल फोन से उनसे फिर पार्टी के निर्धारित नंबर पर मिस्ड कॉल करानी है।
ऐसा नहीं करने पर उनके द्वारा दी गई सूची को फेक मान लिया जाएगा और वे सक्रिय सदस्य नहीं रह पाएंगे। इसी तरह अगर किसी नेता से जुड़े बूथ से सौ प्राथमिक सदस्य भी नहीं बन पाए हैं तो उसकी पकड़ व पहुंच तथा लोगों से संपर्क की क्षमता पर सवाल अलग उठेंगे।