पश्चिम और बृज की बैठकों में विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन के साथ ही दलितों के मुद्दे पर आंदोलन से बनी परिस्थितियों पर भी बातचीत की गई। इस दौरान निष्कर्ष निकला कि भाजपा के लिए परिस्थितियां बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं हैं। कुछ लोगों ने जिस तरह आंदोलन को हिंसक रूप दिया, उससे सभी जगह जनता में काफी नाराजगी है।
कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह तथ्य सामने रखा कि उनके यहां आरक्षण खत्म करने की अफवाह फैलाकर बवाल कराया गया। ऐसे में पार्टी ने सुरक्षित सीटों से जीते सांसदों और विधायकों को दलितों के बीच जाने और उन्हें पूरी हकीकत बताने की जिम्मेदारी सौंपी है।
ये दलितों को बताएंगे कि भाजपा उनके आरक्षण पर प्रतिबद्ध है। सरकार इससे कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही। जहां तक एससी-एसटी एक्ट का मामला है तो न्यायालय ने जांच के बाद गिरफ्तारी की बात कही है। भाजपा की सरकार दलितों के सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। इस सिलसिले में केंद्र और राज्य सरकार के दलितों के कल्याण के लिए किए गए कार्य भी बताने की सलाह दी गई।