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भाजपा बुन रही विरोधियों से निपटने संग घर सहेजने का ताना-बाना, दलितों को भी समझाएगी हकीकत

Thu, 05 Apr 2018 10:32 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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ताजा घटनाक्रम और बदली परिस्थितियों के मद्देनजर भाजपा ने लोकसभा चुनाव 2019 के मद्देनजर विरोधियों से निपटने के साथ ही घर सहेजने का ताना-बाना बुनना शुरू कर दिया है। प्रदेश नेतृत्व की कोशिश है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के 10 अप्रैल को लखनऊ आने से पहले होमवर्क पूरा कर लिया जाए। साथ ही भविष्य की रणनीति का भी खाका खींच लिया जाए।

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इसके लिए पार्टी ने प्रत्येक क्षेत्र में समन्वय बैठकों का सिलसिला शुरू किया है। मंगलवार को पश्चिम क्षेत्र की बैठक थी। बुधवार को आगरा में बृज क्षेत्र की बैठक हुई। इन बैठकों का मकसद क्षेत्रवार पार्टी के लोगों को बैठाकर उनके बीच समन्वय स्थापित कराना और सामूहिक रूप से आगे की चुनौतियों से निपटने की जिम्मेदारी डालने के साथ स्थानीय समस्याओं का समाधान कराना है।

बैठकों में पार्टी के उस क्षेत्र के सांसद, विधायकों, वहां रहने वाले प्रदेश सरकार के मंत्रियों, प्रदेश और क्षेत्रीय पदाधिकारियों, जिलों के प्रमुख पदाधिकारियों, संगठन मंत्रियों के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की क्षेत्रीय टीम के पदाधिकारी भी बुलाए जा रहे हैं। प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय और प्रदेश महामंत्री संगठन सुनील बंसल की मौजूदगी में इन सबसे स्थानीय फीडबैक लेने के साथ आगे की तैयारियों पर बातचीत हो रही है।
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यह है वजह
पिछले दिनों प्रदेश स्तर पर संगठन की बैठकों में कार्यकर्ताओं की शिकायतें आई थीं कि कहीं सांसद और विधायकों में पटरी न खाने से संगठन की मुसीबत है तो कहीं मंत्री और सांसद के बीच तनातनी की स्थिति है। कुछ जगह के संगठन पदाधिकारियों ने प्रदेश नेतृत्व से कहा था कि मंत्रियों, सांसदों और अन्य जनप्रतिनिधियों का संगठन से समन्वय न होने से स्थानीय स्तर पर काफी समस्या होती है। कुछ स्थानों से समानांतर संगठन खड़ा करने जैसी शिकायतें भी आई थीं। इसे देखते हुए पार्टी ने क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय बैठकें शुरू की हैं, ताकि बातचीत कर इन शिकायतों का समाधान कर दिया जाए।

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दलित सांसद व विधायक संभालेंगे मोर्चा

पश्चिम और बृज की बैठकों में विपक्षी दलों के संभावित गठबंधन के साथ ही दलितों के मुद्दे पर आंदोलन से बनी परिस्थितियों पर भी बातचीत की गई। इस दौरान निष्कर्ष निकला कि भाजपा के लिए परिस्थितियां बहुत चुनौतीपूर्ण नहीं हैं। कुछ लोगों ने जिस तरह आंदोलन को हिंसक रूप दिया, उससे सभी जगह जनता में काफी नाराजगी है।

कुछ जनप्रतिनिधियों ने यह तथ्य सामने रखा कि उनके यहां आरक्षण खत्म करने की अफवाह फैलाकर बवाल कराया गया। ऐसे में पार्टी ने सुरक्षित सीटों से जीते सांसदों और विधायकों को दलितों के बीच जाने और उन्हें पूरी हकीकत बताने की जिम्मेदारी सौंपी है।

ये दलितों को बताएंगे कि भाजपा उनके आरक्षण पर प्रतिबद्ध है। सरकार इससे कोई छेड़छाड़ नहीं कर रही। जहां तक एससी-एसटी एक्ट का मामला है तो न्यायालय ने जांच के बाद गिरफ्तारी की बात कही है। भाजपा की सरकार दलितों के सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिए कटिबद्ध है। इस सिलसिले में केंद्र और राज्य सरकार के दलितों के कल्याण के लिए किए गए कार्य भी बताने की सलाह दी गई।
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