ग्राम प्रधानी चुनाव की दिलचस्पी ने भाजपा के संगठनात्मक चुनाव को भंवर में उलझा दिया है। इसके चलते संगठनात्मक चुनाव निर्धारित समय सारिणी से काफी पिछड़ गए हैं।
स्वाभाविक है कि प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव अब जनवरी से पहले हो पाना मुश्किल है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, भाजपा की बूथ कमेटियों के चुनाव अब तक हो जाने चाहिए थे। पर, स्थिति यह है कि 25 प्रतिशत कमेटियों का भी चुनाव नहीं हो पाया है।
बूथ कमेटियों के चुनाव में देरी स्वाभाविक रूप से मंडल और जिला कमेटियों के चुनाव को प्रभावित किए बिना नहीं रहेगी। प्रदेश में लगभग 1.40 लाख बूथ हैं। भाजपा ने लगभग 1.12 लाख बूथों पर पार्टी की सदस्यता कराई है।
पार्टी के चुनाव अधिकारी डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने बूथ कमेटियों के चुनाव 20 नवंबर तक करा लेने का लक्ष्य रखा था, पर प्रधानी के चुनाव के रंग में डूबे पार्टी कार्यकर्ताओं ने संगठन से पहले ग्राम पंचायत चुनाव को तवज्जो दी। इसके चलते ज्यादातर जगहों पर बूथ कमेटियों के चुनाव की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो पाई है।
मंडल व जिला चुनाव पर भी ग्रहण : जब बूथ कमेटियों के ही चुनाव नहीं हो पाए हैं तो मंडल (ब्लॉक या वार्डों के समूह पर बनी इकाई) अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों के चुनाव होना तो दूर की बात है। मंडल कमेटियों के चुनाव 30 नवंबर तक पूरे हो जाने थे।