लखीमपुर खीरी में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र के बेटे आशीष मिश्र की गाड़ी से किसानों के कुचले जाने का मामला आपराधिक से कहीं अधिक राजनीतिक मुद्दा बन गया है। इसको लेकर जनता में बन रही धारणा से भाजपा दबाव में है और वह जल्द कोई फैसला ले सकती है।
उधर, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अजय मिश्र का पुत्र आशीष यदि वह एसयूवी नहीं चला रहा था, जिससे किसान कुचले गए, तो उसके खिलाफ कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है। पूर्व डीजीपी डॉ एनसी अस्थाना का कहना है कि यदि आशीष उस गाड़ी में मौजूद भी था, तो भी उस पर हत्या या गैर इरादतन हत्या का मामला नहीं बनता है।
नाराज किसानों ने आशीष के ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। लेकिन चूंकि इस मामले को विपक्षी दलों ने इतना अधिक तूल दे दिया है और सुप्रीम कोर्ट ने भी इसका संज्ञान लिया है, इसलिए भाजपा को कोई न कोई कदम तो उठाना ही पड़ेगा।
प्रदेश अध्यक्ष के बयान से बदला रुख
अब तक भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक सभी नेता इस मामले में कानून अपना काम कर रहा है और पार्टी जांच एजेंसियों पर कोई प्रभाव नहीं डाल रही, जैसे बयान दे रहे थे। लेकिन प्रदेश भाजपा अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के बयान से भाजपा के रुख में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने कहा था, हम कार से लोगों को कुचलने के लिए राजनीति में नहीं आए हैं। माना जा रहा है कि चार महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव और अदालत के कड़े रुख के चलते पार्टी कोई सख्त फैसला ले सकती है।