कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रहे अमेठी में भी भाजपा ने परचम फहराया है। वहीं सपा के प्रभाव वाले कन्नौज, मैनपुरी, फिरोजाबाद, बदायूं, फर्रुखाबाद, रामपुर, अमरोहा, मुरादाबाद और संभल जैसे जिलों में भाजपा ने परचम फहराया है।
पश्चिम से पूरब तक दबदबा
जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में पश्चिम से लेकर पूरब तक भाजपा ने दबदबा कायम रखा। भाजपा के संगठनात्मक क्षेत्रों की दृष्टि से पश्चिम क्षेत्र में 14 जिलों में से 13 में भाजपा और एक बागपत में रालोद ने चुनाव जीता है। ब्रज क्षेत्र के 12 जिलों में से 11 में भाजपा और एक एटा में सपा विजयी हुई है। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र की 14 में से 13 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की है। इटावा में सपा उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। अवध क्षेत्र की सभी 13 जिलों में भाजपा का कब्जा रहा। काशी क्षेत्र में 12 में से दस जिलों में भाजपा ने चुनाव जीता है जबकि जौनपुर में निर्दलीय और प्रतापगढ़ में जनसत्ता पार्टी ने चुनाव जीता है। गोरखपुर क्षेत्र में भाजपा ने 10 में से सात जिलों में जीत दर्ज की है। तीन जिलों में सपा को जीत मिली है।
सपा का रिकार्ड तोड़ा
इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा ने सपा के 2016 में 63 जिलों में जीत का रिकार्ड तोड़ दिया है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा को अपेक्षित सफलता न मिलने के बाद राजनीतिक पंडित मान रहे थे कि जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव में भाजपा सपा का रिकार्ड नहीं तोड़ पाएगी। लेकिन सरकार और संगठन की साझा रणनीति से भाजपा ने न केवल पिछला रिकार्ड तोड़ा बल्कि नया रिकार्ड भी बना दिया है।