नरेंद्र मोदी के कार्यक्रमों की इजाजत न मिलने के विरोध में जिला प्रशासन और चुनाव आयोग पर आरोप, बीएचयू के गेट पर धरना, आजमगढ़ रैली में मोदी का आयोग पर सीधा हमला, दिल्ली में धरने के साथ ही भाजपा नेताओं का चुनाव आयोग से मिलना।
विज्ञापन
बृहस्पतिवार के यह घटनाक्रम अलग-अलग जरूर हों लेकिन सब कुछ बेहद नियोजित तरीके से चला। भाजपा ने चुनाव आयोग को निशाने पर लेकर एक तीर से कई निशाने साधे हैं।
आखिरी चरण में प्रदेश की 18 सीटों पर मतदान से पहले भाजपा आम लोगों और मीडिया का आकर्षण चुराकर सियासत के केंद्र में तो आ ही गई, बाहुबल के लिए चर्चित पूर्वांचल में निष्पक्ष चुनाव कराने को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजामों के लिए दबाव भी बना दिया।
विज्ञापन
भाजपा की थी ये सोची-समझी रणनीति
सियासी महासमर-2014 का आखिरी दंगल 12 मई को होगा। इसी दिन वाराणसी और आजमगढ़ समेत प्रदेश की 18 सीटों पर वोट डाले जाएंगे।
पड़ोसी बिहार की बाकी सीटों पर भी इसी दिन वोट पड़ेंगे। इस दौर में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी वाराणसी और सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़ रहे हैं।
पूर्वांचल और बिहार की इन सीटों की नई सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
लिहाजा, भाजपा इन सीटों पर जीत हासिल करने के लिए खास रणनीति अपना रही है। निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलने को इसी का हिस्सा माना जा रहा है।
बूथ कैप्चरिंग की जताई थी आशंका
अब देश में केवल 41 सीटों पर चुनाव बाकी हैं, ऐसे में भाजपा के आरोपों के बाद इन क्षेत्रों में निष्पक्ष चुनाव के लिए और कदम उठाए जा सकते हैं।
प्रदेश में पांचवें चरण के चुनाव से पहले भी भाजपा ने बूथ कैप्चरिंग की आशंका जताई थी और केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की थी।
आयोग ने उनकी यह मांग उसी दिन मान ली थी। बहुत संभव है कि मोदी के तीखे तेवरों का जवाब चुनाव आयोग पूर्वांचल में मतदान के लिए कुछ प्रभावी कदम उठाकर दे।
पूर्ण बहुमत से चूक की आशंका
महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र प्रताप कहते हैं कि भाजपा की चुनावी रणनीति कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों से बेहतर है।
हर चरण में सियासी लाभ के लिए भाजपा ने कोई न कोई हथकंडा इस्तेमाल किया। पिछले चरण में नीच राजनीति संबंधी प्रियंका वाड्रा के बयान को निचली जातियों से जोड़कर बड़ी चतुराई से ओबीसी कार्ड खेलने की कोशिश की।
निर्वाचन आयोग पर भाजपा का चौतरफा हमला भी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। भाजपा किसी भी कीमत पर दिल्ली में सरकार बनाना चाहती है।
इसके लिए उसे छल-बल से भी परहेज नहीं है। भाजपा को आशंका है कि सरकार में कुछ सीटों की कमी रह सकती है, इसलिए आखिरी चरण के मतदान पर उनकी नजर है।
बूथ कैप्चरिंग जैसे आरोप लगाकर भाजपा वोटरों की सहानुभूति हासिल करने के लिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि उसके साथ अन्याय हो रहा है।
बाहुबलियों पर लगाम की कोशिश
पश्चिमी यूपी के विपरीत पूर्वांचल की राजनीति में बाहुबल की भी भूमिका रहती है।
भाजपा को लगता है कि निर्वाचन आयोग पर दबाव बनाकर उन सीटों पर वे सुरक्षा के बेहतर बंदोबस्त कराने में सफल हो सकते हैं, जहां 12 मई को मतदान होना है।
आजमगढ़ में मुलायम सिंह यादव के चुनाव लड़ने के कारण उन्हें सत्ता के दखल से चुनाव प्रभावित होने का अंदेशा है, शायद इसीलिए वह निर्वाचन आयोग के खिलाफ खुलकर बोले।
आजमगढ़ में मोदी ने कहा- ‘मैं बहुत जिम्मेदारी के साथ चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रहा हूं’ उन्होंने कहा, आयोग पिछले तीन चरणों में निष्पक्ष चुनाव कराने में नाकाम रहा है।