दलितों वोटों की असली सौदागर तो स्वयं बसपा सुप्रीमो मायावती हैं। पार्टी से निष्कासित महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी तो महज कैशियर की भूमिका निभा रहे थे। ये बातें भाजपा के प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने यहां बुधवार को कही।
त्रिपाठी ने कहा, विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से बसपा में रार मची हुई है। मायावती हार के कारणों को स्वीकार करने के बजाय इसका ठीकरा कभी ईवीएम पर फोड़ती हैं, तो कभी अपनी पार्टी के किसी नेता पर संगीन आरोप लगाती हैं।
साथ ही उन्होंने कहा, बसपा सुप्रीमो यह बताएं कि सिद्दीकी ने चुनावों में किसके कहने पर धन उगाही की और उसे कहां-कहां पहुंचाया। सिद्दीकी तो महज मुहर हैं।