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मेरठ से दिल्ली की जंग लड़ेंगे चौधरी, साथ होंगे कई योद्धा!

Mon, 29 Sep 2014 02:46 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष व पूर्व मंत्री चौधरी अजित सिंह ने दिल्ली की लड़ाई मेरठ से लड़ने का फैसला किया है। दिल्ली में चौधरी चरण सिंह का स्मारक बनाने के मुद्दे पर 12 अक्तूबर को मेरठ में चौधरी साहब का पुराना कुनबा जुटेगा। उन्होंने इसके लिए अपनी होम पिच तो चुनी ही है, साथ ही सियासी योद्धाओं को भी बुलावा भेज दिया है।
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चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले होने वाली रैली में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जदयू अध्यक्ष शरद यादव और तेलंगाना के मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव का आना तय हो गया है।

ऐसी संभावना है कि एक जमाने में चौधरी चरण सिंह के सबसे विश्वस्त रहे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव भी मेरठ रैली में शामिल होंगे।

स्मारक के लिए होगा शक्ति प्रदर्शन

दिल्ली में 12, तुगलक रोड बंगले को चौधरी चरण सिंह स्मारक बनाने की मांग पश्चिमी यूपी के कई जिलों में जोर पकड़े हुए है। एक दौर में चौधरी चरण सिंह के नजदीकी रहे नेता आजकल अलग-अलग दलों में हैं।

हालांकि चौधरी साहब का स्मारक बनाने की मांग पर वे एक साथ आ रहे हैं। तो रालोद इस मौके को अपने खोए जनाधार की वापसी के अवसर के रूप में देख रहा है।

रैली स्मारक बनाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हो रही है लेकिन इसके पीछे पूरी ताकत रालोद ही लगा रहा है। रालोद नेताओं के मुताबिक उड़ीसा से सीएम बीजू पटनायक, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भी रैली में पहुंचेंगे।

मुलायम भी दे सकते हैं साथ

रालोद के एक नेता का कहना है कि हरियाणा और पश्चिम यूपी की खापों के चौधरी रैली में खासतौर पर शिरकत करेंगे। हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला ने भी रैली में आने की इच्छा जताई है।

हालांकि, चौधरी अजित सिंह ने कहा है कि 15 अक्तूबर को हरियाणा में विधानसभा उपचुनाव है। ऐसे में स्मारक बनाने की मांग के लिए उनका नैतिक समर्थन ही काफी है।

ऐसी संभावना है कि मुलायम सिंह यादव भी इस रैली में शामिल हो सकते हैं। मुलायम सिंह खुद को चौधरी चरण सिंह का राजनीतिक उत्तराधिकारी कहते हैं।

चौधरी साहब के जीवित रहते वह उनके सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल थे। चौधरी साहब ने उन्हें न केवल विधानसभा और विधान परिषद में नेता विरोधी दल बनाया बल्कि लोकदल के प्रदेश अध्यक्ष की कमान भी सौंपी थी। सपा पहले ही चौधरी साहब का भव्य स्मारक बनाने और उन्हें भारत रत्न देने की मांग कर चुकी है।

नए सियासी ध्रुवीकरण के संकेत तो नहीं

मेरठ में 12 अक्तूबर को प्रस्तावित रैली को प्रदेश में नए राजनीतिक ध्रुवीकरण के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि निकट भविष्य में सूबे में भाजपा विरोधी दलों की एकजुटता की कोशिश हो सकती है।

एक मंच पर आने से मुलायम सिंह और अजित सिंह भी नजदीक आ सकते हैं। इसकी पहली बानगी नवंबर में होने वाले राज्यसभा चुनावों में भी देखने को मिल सकती है।

चर्चा है कि चौधरी अजित सिंह कांग्रेस व रालोद के संयुक्त प्रत्याशी के तौर पर राज्यसभा उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन सपा भी उन्हें राज्यसभा भेजने का ऑफर दे सकती है।
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कैराना विस उपचुनाव पर पड़ेगा असर

पश्चिमी यूपी के शामली जिले की कैराना विधानसभा सीट पर 15 अक्तूबर को उपचुनाव होना है। शामली को चौधरी अजित सिंह के प्रभाव वाला जिला माना जाता है।

वहां के लोग बड़ी संख्या में रैली में शामिल होंगे। सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के मेरठ रैली में जाने का संदेश कैराना तक जाएगा। इससे सपा को राजनीतिक लाभ मिल सकता है।

यूं भी बिजनौर और ठाकुरद्वारा विधानसभा सीटों के उपचुनाव में जाट मतदाताओं ने सपा को वोट देने में परहेज नहीं बरता। दोनों सीटों पर जाटों वोटों का ठीकठाक हिस्सा सपा के पक्ष में गया था।
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