जोनल अफसर ने बताया कि मामला तब पकड़ में आया जब एसडीएम के यहां से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की रिपोर्ट के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने को लेकर कर्मचारी उनसे ओटीपी लेने आया। जब उन्होंने फाइल देखी तो पता चला कि एसडीएम से प्रमाण पत्र जारी करने की अनुमति को लेकर जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उस पर तो उन्होंने हस्ताक्षर ही नहीं किए थे। इस बारे में कर अधीक्षक से पूछा गया तो उन्होंने भी इंकार किया। इसके बाद प्रमाण पत्र को जारी करने पर रोक लगाई गई और कर्मचारी को नौकरी से हटाया गया।
जिस महिला का मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाया जा रहा था, वह अंबेडकर नगर की रहने वाली थी। उसकी मौत 20 मई 2021 को बताई गई थी। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर चार साल तक मृत्यु प्रमाण पत्र क्यों नहीं बनवाया। जानकारों ने बताया कि यदि किसी की मृत्यु पीजीआई में हुई है तो उसका प्रमाण पत्र पीजीआई से ही जारी होता है।
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नगर निगम से जारी नहीं किया जा सकता क्योंकि साल 2019 से केंद्र सरकार ने यह व्यवस्था लागू कर दी थी कि सरकारी अस्पताल, मेडिकल काॅलेज और संस्थानों में यदि जन्म-मृत्यु होती है तो प्रमाण पत्र वहीं से जारी किया जाएगा। अगर घर में हुई है या प्राइवेट अस्पताल में तो नगर निगम जारी करेगा। ऐसे में फर्जी तरह से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कराकर कोई फर्जीवाड़ा किए जाने की तैयारी थी।
नगर निगम के सूत्रों ने बताया कि मृत्यु या जन्म के 21 दिन के अंदर प्रमाण पत्र जारी हो जाता है तो जांच की जरूरत नहीं पड़ती है। उसके बाद जांच कराई जाती है। इसमें एक साल पुराने प्रमाण पत्र के मामले में एसडीएम से अनुमति ली जाती है। उसके लिए नगर निगम से रिपोर्ट भेजी जाती है, जिसके लिए नगर निगम के सफाई निरीक्षकों को जांच कर रिपोर्ट देनी होती है। इसके लिए कई जोन में प्राइवेट कर्मचारी लगाए हैं जो यह फर्जीवाड़ा करते हैं।