वाराणसी पुलिस ने राष्ट्रीय प्रवेश पात्रता परीक्षा (एनईईटी) में सेंधमारी की कोशिश करने वाले बड़े गैंग का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में वाराणसी के बीएचयू की बीडीएस की एक छात्रा जूली जो साल्वर थी, उसे व उसकी मां को गिरफ्तार किया गया है। जूली त्रिपुरा की रहने वाली हिना विश्वास के स्थान पर परीक्षा दे रही थी। प्रकाश में आए लखनऊ स्थित किंग जार्ज मेडिकल युनिवर्सिटी डॉक्टर ओसामा शाहिद और साल्वर गैंग के सरगना पीके व विकास की तलाश की जा रही है।
जानकारी के अनुसार रविवार को आयोजित एनईईटी की परीक्षा प्रदेश के लगभग सभी बड़े शहरों में आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में सेंधमारी रोकने के लिए अलग अलग जिलों की पुलिस और एसटीएफ भी लगी थी। वाराणसी पुलिस को वाराणसी में साल्वर गैंग के सक्रिय होने की जानकारी मिली थी। वाराणसी के पुलिस कमिश्नर ए सतीश गणेश ने इसकेलिए एक टीम बनाकर घेरा बंदी शुरू की। इधर लखनऊ कमिश्नरेट की पुलिस भी ऐसे गैंग पर नजर रख रहा था। लखनऊ पुलिस जिस गैंग पर नजर रख रही थी, उस गैंग के सदस्य वाराणसी में भी सक्रिय थे। लखनऊ पुलिस ने जानकारी वाराणसी पुलिस से साझा की और परीक्षा समाप्त होने से पहले ही वाराणसी साल्वर के रूप में परीक्षा दे रही जूली को हिरासत में ले लिया। पूछताछ में जूली ने जो जानकारी पुलिस को दी उससे कुछ देर के लिए पूछताछ कर रहे पुलिस कर्मियों के भी दिमाग चकरा गए।
जूली ने बताया कि यह एक बड़ा गैंग है जिसका संचालन पटना से होता है। ग्राहक बैंगलुरू से तलाशे जाते हैं और साल्वर यूपी और बिहार से। इसके पीछे पैसों का बड़ा खेल होता है। यह गैंग दो तरह के लोगों की तलाश करता है। एक तो जो पैसों के बल पर बिना परीक्षा दिए नीट की परीक्षा पास करना चाहते हैं और दूसरा जो अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दूसरे के स्थान पर परीक्षा दे सकते हैं।
पूरे साल करते हैं तैयारी
यह गैंग पूरे साल तैयारी करता है। जो अभ्यर्थी नीट की परीक्षा में पहले अटेंप्ट में नाकाम रहते हैं, ऐसे छात्रों को डाटा कोचिंग सेंटरों से ले लिया जाता है और फि र फोन कर फेल होने वाले अभ्यर्थियों से संपर्क किया जाता है। संपर्क करने के बाद ऐसे अभ्यर्थियों को टार्गेट बनाया जाता है जो पैसों से संपन्न होता था। उन्हें कोटे की सीट बताकर एडमिशन दिलाने की बात की जाती थी और इसके बदले मोटा डोनेशन मांगा जाता था। जो पैसा खर्च करने के लिए तैयार होता था उसका फार्म इस गैंग के सदस्य खुद भरते थे। दूसरा गैंग साल्वर की तलाश करता था। साल्वर मिल जाने पर अभ्यर्थी और साल्वर की फोटो फोटो शॉप के जरिए मर्ज कर बनाई जाती थी। उसी फोटो को फार्म पर लगा दिया जाता था।
क्या है केजीएमयू के डाक्टर की भूमिका
केजीएमयू का डाक्टर ओसामा शाहिद मूल रूप से मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना का रहने वाला है। 2016 का पास आउट है। पुलिस को जानकारी मिली है कि बैंगलुरू के बब्लू ने ओसामा से संपर्क किया था। जिसके बाद ओसामा की मुलाकात पटना के पीके से हुई। यहीं से ओसामा पीके के गैंग का सक्रिय सदस्य बन गया। उसे कंडीडेट लाने पर 1 लाख रुपये दिए जाते थे। ओसामा की तलाश में वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट की टीम लखनऊ, मऊ और आजमगढ़ में दबिश दे रही है। ओसामा की गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।