1970 का दशक था। चौधरी चरण सिंह पूरे क्षेत्र में बड़ी सभाओं में शिरकत करते थे। उनके कार्यक्रमों में रागिनी का भी आयोजन होता था, पर अमूमन जब चौधरी चरण सिंह पहुंचते तो भजन ही गाए जाते थे। रात-रात भर भजनों का सिलसिला चलता। उन्हीं दिनों कुतुबपुर गांव के नंदराम रागिनी गाते थे। भजनों पर उनके सुर के तो कहने ही क्या थे। लोग मंत्रमुग्ध हो जाते।
चौधरी चरण सिंह ने एक सभा में उनका भजन सुना तो बेहद प्रभावित हुए। फिर तो सभाओं में लगातार नंदराम को भजन गाने के लिए बुलाया जाने लगा। बात 1974 की है। चौधरी चरण सिंह ने उन्हें बुलाकर कहा, चुनाव लड़ो। यह सुन नंदराम अवाक रह गए।
अनुसूचित जाति के नंदराम को चरथावल से टिकट मिला और वह जीत गए। 1977 में भी वह जीते। खुद चौधरी चरण सिंह ने उनके लिए वोट मांगे। कई बार नंदराम की झोपड़ी में भोजन किया। पर, खाने के बाद वे नंदराम से ‘होरी के गीत’ जरूर सुनते थे।