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धड़कते दिल तक खून पहुंचाने को बनाया अलग रास्ता

Sat, 06 Aug 2016 03:20 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
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इसी मरीज का हुआ आपरेशन - फोटो : amar ujala
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लोहिया संस्थान के डॉक्टरों ने धमनियों में पांच ब्लॉकेज की समस्या से जूझ रहे मरीजों के ऑपरेशन कर दिल को खून पहुंचाने के लिए अलग रास्ता बना दिया।
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डेढ़ घंटे चली सर्जरी (बीटिंग हार्ट टोटल आर्टरी री-वैस्कुलराइजेशन) के बाद मरीज को हमेशा के लिए इस परेशानी से निजात मिल गई। 
बीटिंग हार्ट सर्जरी की खासियत है कि इसमें मरीज को अधिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है। लोहिया संस्थान में इस तरह की यह पहली सर्जरी है।  

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के कॉर्डियो थोरेसिक वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ध्रुवलाल (60) और रामदेव (62) को सीने में दर्द और सांस लेने में तकलीफ के बाद कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था। 

ईको और एंजियोग्राफी में हार्ट वेलस में तीन से पांच ब्लॉकेज मिले। इसके लिए ऑपरेशन जरूरी होने पर दोनों मरीजों को सीटीवीएस विभाग रेफर कर दिया गया।

विभाग के डॉ. डीके श्रीवास्तव और डॉ. एसएस राजपूत ने बताया कि रिपोर्ट देखने के बाद संस्थान में पहली बार ‘बीटिंग हार्ट टोटल आर्टरी रिवैस्कुलराइजेशन सर्जरी’ प्लान की गई। 
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सीने पर छह इंच का चीरा लगाकर हड्डी ‘स्टर्नम’ को काटा गया। इसके बाद रिमा और लिमा आर्टरी को निकालकर ब्लॉकेज वाली जगह से अलग खून के बहाव का रास्ता बनाया गया। 
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दोनों मरीजों की हालत में हो रहा है सुधार

डेमो ‌पिक
ग्राफ्टिंग के बाद खून के बहाव का नया रास्ता बनते ही रक्त प्रवाह सामान्य हो गया। इसके बाद दिल को पर्याप्त मात्रा में खून मिलने लगा। मेडिकल की भाषा में इसे कॉर्नरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग सर्जरी कहा जाता है।

बुधवार को डेढ़-डेढ़ घंटे में दोनों मरीजों की सर्जरी की गई। दोनों मरीजों की हालत में निरंतर सुधार हो रहा है। पीजीआई व केजीएमयू में इस तरह की सर्जरी की सुविधा पहले से है।

डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि इस सर्जरी में मरीज को हार्ट लंग मशीन की जरूरत नहीं पड़ी। इसमें ऑपरेेशन के दौरान दिल धड़कता रहा। हार्ट लंग की जरूरत तब होती है जब ब्लॉकेज ठीक करने के लिए पैर की सैफनेस नस को निकालकर एओटा से दिल तक जोड़ा जाता है।

इस दौरान हार्ट लंग मशीन दिल को सपोर्ट करती है। बीटिंग हार्ट सर्जरी में एओटा से रक्त का प्रवाह चलता रहा, साथ ही ब्लॉकेज की जगह से आगे जोड़कर उसी नस से नया रास्ता बना दिया गया। 

सर्जरी करने वाली टीम
डॉ. डीके श्रीवास्तव के साथ डॉ. एसएस राजपूत, डॉ. अमित चौधरी, डॉ. संदीप, डॉ. लता के साथ एनेस्थेसिया विभाग के डॉ. पीके दास, डॉ. दीपक मालवीय और नर्सिंग स्टाफ में धर्मेंद्र, छाया समेत अन्य लोग मौजूद रहे। 

डॉ. अमित चौधरी बताते हैं कि पहले हार्ट लंग मशीन की मदद से सर्जरी होती थी तो पैर की सैफनेस नस से खून का प्रवाह बनाया जाता था। इसमें हृदय रोगी के पैर में भी गहरा जख्म हो जाता था क्योंकि नस निकालने के लिए पैर में चीरा लगाया जाता था।

बीटिंग हार्ट सर्जरी में सीने के अलावा कहीं चीरा नहीं लगाया जाता है। ऐसे में मरीज तेजी से रिकवर करता है और चलने-फिरने में दिक्कत नहीं होती है। 

लोहिया संस्थान में बीटिंग हार्ट टोटल आर्टरी री-वैस्कुलराइजेशन सर्जरी में करीब एक लाख बीस हजार का खर्च आया। इसी सर्जरी पर निजी संस्थान में चार लाख से अधिक खर्च करने पड़ते हैं।

डॉ. राजपूत ने बताया कि संस्थान में सस्ती दर पर रोगियों के ऑपरेशन की सुविधा है। संस्थान की फार्मेसी से सस्ती दर पर दवाएं भी मिलती हैं। 
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