लखनऊ। ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में बेड संख्या पांच, छह और सात पर लेटे सोनू, मुंदर और संतोष दोहरे दर्द से जूझ रहे थे। डॉक्टरों की टीम उनके शरीर पर लगी चोट का इलाज करने में जुटी हुई थी, पर इनके दिल पर लगी चोट का इलाज इनमें से किसी डॉक्टर के पास नहीं था। बाराबंकी में हुई दुर्घटना में संतोष ने अपना बाप खोया था तो मुंदर और सोनू ने अपना भाई। देखते-देखते बस का पहिया इनके ऊपर से गुजर गया। लाचारी ऐसी थी कि घायल होने की वजह से उनकी मदद के लिए उठ भी नहीं सके। अब ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी में लेटे हुए यह सोचकर दिल भारी हो रहा है कि वे अपने सगे संबंधियों की अर्थी को कंधा तक नहीं दे पाएंगे।
घटना में अपने पिता को गंवाने वाले संतोष ने बताया कि बस का पहिया उनके पिता के ऊपर से निकल गया। एक सवारी उनके ठीक बगल में लेटी थी। बस का पहिया उसके ऊपर से निकला तो चपेट में संतोष भी आ गया। इसकी वजह से उसकी रीढ़ की हड्डी में गहरी चोट आ गई। चोट की वजह से वह हिलने-डुलने में भी असमर्थ था। मुंदर और सोनू दोनों के भाई भी इस घटना में अपनी जान गंवा बैठे। मुंदर को सिर में गंभीर चोट लगी है जबकि सोनू को पैर में चोट लगने के साथ ही शरीर पर कई घाव हैं।
पैसा कमाने गये थे अपने को गंवा बैठे
दुर्घटना में घायल ज्यादातर अंबाला रोजगार की तलाश में गए थे। वहां से सभी अपने घर वापस आ रहे थे। उनको नहीं पता था कि पैसा कमाने के बजाय उन्हें अपनों को गंवाना पड़ जाएगा। घटना के बाद घायलों ने फोन करके घर में मौजूद लोगों को इसकी सूचना दी। बुधवार दोपहर तक केवल एक-दो के ही रिश्तेदार ट्रॉमा सेंटर पहुंच पाए थे। जबकि कुछ लोग बाराबंकी में ही मृतकों की लाश ले जाने की व्यवस्था में लगे थे।
घायलों से भर गई ट्रॉमा सेंटर की कैजुअल्टी
केजीएमयू के ट्रॉमा सेंटर में बुधवार सुबह एक साथ 11 घायलों के आने के बाद कैजुअल्टी के सभी बेड भर गए। किसी के सिर में चोट थी तो किसी की रीढ़ की हड्डी में चोट आ गई थी। हाथ-पैर फ्रैक्चर होने के अलावा छोटे-बड़े घाव तो लगभग सभी के शरीर पर थे। ट्रॉमा सेंटर को इन मरीजों के आने की सूचना पहले ही मिल गई थी, इनके पहुंचने से पहले ही पूरी व्यवस्था हो चुकी थी।
ट्रामा सेंटर के अधीक्षक डॉ. संदीप तिवारी ने बताया कि जैसे ही बाराबंकी के घायलों को लखनऊ शिफ्ट करने की सूचना मिली तो कैजुअल्टी में भर्ती मरीजों को वार्ड में शिफ्ट कर जगह बनाई गई। कुल 11 मरीजों को भर्ती कराया गया। इसमें से एक को सिर में, दो की हड्डी टूटने और एक को स्पाइन पर चोट थी। बाकी घायलों को मामूली चोट लगी थी। इन सभी का कैजुअल्टी में इलाज किया जा रहा है। डॉ. संदीप के अनुसार सभी की हालत खतरे से बाहर है। मरीजों के परिजन मोबाइल नंबर- 8887019133 और 9453004209 पर कॉल करके हालचाल ले सकते हैं।
घायलों की सूची
भोला(60), इंदल साहनी(36), सुरेश पंडित(35), मिथलेश(40), संतोष कुमार(20), शंभू(33 ), जोगिंदर(45), सोनू साहनी(39), मुंदर साहनी(38), मिश्री लाल(50) और शंभू 29 वर्ष।
बस में ठूंसकर भरी गईं सवारियां
दुर्घटना में घायल हुए मुंदर साहनी ने बताया कि वे लोग अंबाला से अपने घर जाने के लिए बस में चढ़े थे। निजी बस चालक ने 160 से 165 सवारियां ठूंसकर भर लीं। सभी को घर जाने की जल्दी थी इसलिए मजबूरी में बस में बैठना पड़ा। मुंदर के अनुसार उसे नहीं पता था कि यह यात्रा इतनी भयानक होने वाली है।
जोरदार टक्कर की आवाज हुई और लोगों को कुचलती नजर आई बस
घटना में घायल सोनू ने बताया कि बस में पहले से ही ठूंसकर सवारियां भरी गई थीं। बाराबंकी के करीब आते-आते रात 12 बजे के करीब बस का एक्सेल टूट गया। इसलिए ड्राइवर बस किनारे खड़ी कर उसे सही करने लगा। गर्मी की वजह से ज्यादातर सवारियां बस के सामने ही सड़क पर लेट गईं। कुछ को नींद आने लगी जबकि कुछ आधी नींद में थे। थोड़ी ही देर में अचानक जोरदार टक्कर की आवाज हुई। इससे नींद खुली तो देखा कि बस आसपास के लोगों को कुचलते हुए आगे बढ़ती जा रही थी। किसी के पास इतना समय नहीं था कि खुद उठकर भाग पाता या किसी की मदद कर पाता। जो जहां था वहीं रह गया। जिसके ऊपर बस का पहिया चढ़ा उसकी जान मौके पर ही चली गई। जबकि घायल चीख-पुकार करने लगे। थोड़ी ही देर में मौके पर पुलिस पहुंची और घायलों को बाराबंकी के जिला अस्पताल में भर्ती कराया। वहां से 11 लोगों को सुबह शिफ्ट किया गया।
ज्यादातर घायल दरभंगा और सीतामढ़ी के
एक्सीडेंट में घायल हुए ज्यादातर लोग बिहार के दरभंगा और सीतामढ़ी के हैं। ये सभी अंबाला से बस में सवार हुए थे। इन सभी का पहले से परिचय भी था। कई लोग तो एक ही परिवार के थे तो वहीं कुछ लोग जान-पहचान के थे।