लखनऊ में फिल्मी स्टाइल में 'बैंक चोरी'
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एसीपी विभूतिखंड ने बताया कि बैंक में 90 लॉकर थे। 20 लॉकर खाली है। 70 एक्टिव हैं। चोरों ने सिर्फ 42 लॉकरों को ही तोड़ा था, जिसमें से दो लॉकर खाली थे। चोरों ने लॉकर काटने के लिए इलेक्ट्रिक कटर का प्रयोग किया था। पुलिस के सूत्र बताते हैं कि बिहार के चोरों के गैंग में कुछ चोर लॉकर काटने में माहिर हैं। उनको इस बात का पता अच्छे से था कि लॉकर का ताल किस जगह सबसे कमजोर होता है। समय की कमी के वजह से चोरों ने ऊंचाई पर बने लॉकर को तोड़ने का प्रयास भी नहीं किया।
गैंग के हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी
बिहार के चोरों के गैंग के हर व्यक्ति की भूमिका पहले से तय थी। किसी को बैंक की रेकी करनी है। किसको दीवार काटना है। कौन लॉकर काटेगा और कौन बाहर खड़ा होकर रेकी करेगा। यह सारा काम पहले से चोरों ने आपस में बांट रखा था।
पुलिस की गश्त व संदिग्धों की चेकिंग किस काम की
बैंक परिसर और उसके आसपास संदिग्धों की चेकिंग का अभियान अक्सर चलाया जाता है। इलाके के दरोगा व सिपाही बैंक के अंदर जाकर दिन में बैंक चेक करते हैं। वहां रखे रजिस्टर पर इसकी एंट्री भी पुलिस वाले करते हैं। बाहर खड़े होने व आने-जाने वाले संदिग्धों को चेक करने का काम भी पुलिस करती है, पर इंडियन ओवरसीज बैंक में हुई घटना में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई है। चार दिन तक चोर बैंक की रेकी करते रहे और पुलिस को संदिग्ध नजर ही नहीं आए। वहीं रात के वक्त की जाने वाली गश्त भी हाथी के दिखाने वाले सफेद दांत की तरफ साबित हुई। रात 12 बजे बाइक से चोर बैंक पहुंचे, साढ़े तीन घंटे तक चोरी की और फिर बड़ी आराम से करोड़ों का माल बटोर कर भाग निकले। रात गश्त करने वाली पुलिस टीम सोती रह गई। फिलहाल चिनहट पुलिस की इस लापरवाही पर अधिकारियों ने पर्दा डाल दिया और तीन चोरों को पकड़ कर वाहवाही लूट ली।