समाज कल्याण विभाग में 36 साल से दूसरे के नाम पर नौकरी करने वाला बड़ा बाबू निलंबित कर दिया गया है। गोरखपुर के इस मामले में उसकी ‘सेवानिवृत्ति’ की तिथि के चार दिन पहले यह कार्रवाई की गई है। अमर उजाला ने 15 दिसंबर के अंक में इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया था।
समाज कल्याण विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, 4 फरवरी 1985 को रवि प्रकाश मिश्र के नाम नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। लेकिन मिश्र के स्थान पर तभी से रवि प्रकाश चतुर्वेदी काम कर रहा था। फर्जी नाम से नौकरी करने वाले चतुर्वेदी की कथित सेवानिवृत्ति की तिथि भी इस साल 31 दिसंबर है।
उच्चस्तरीय निर्देश पर गोरखपुर के डीएम विजय किरन आनंद की गोपनीय रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों की पुष्टि की गई है। डीएम की रिपोर्ट के आधार पर समाज कल्याण निदेशक राकेश कुमार ने प्रधान सहायक रवि प्रकाश चतुर्वेदी को निलंबित कर दिया है। मामले में आगे की जांच उप निदेशक, समाज कल्याण, वाराणसी मंडल को सौंपी गई है। निदेशालय ने यह रिपोर्ट शासन को भी भेज दी है।