आजम खां से गहरे ताल्लुख रखने वालों का कहना है कि वह अब्दुल्लाह आजम खां के भविष्य को लेकर फिक्रमंद हैं। अब्दुल्लाह अभी विधायक हैं। ऐसे में कोई भी कदम उठाने से पहले अब्दुल्लाह का चेहरा उनके सामने होता है। उम्र के इस पड़ाव पर पहुंचे के बाद वह नई राह पकड़ेंगे, इस पर संशय है। यह भी कहा जा रहा है कि आजम खां सपा के संस्थापक रहे तो जब भी सपा सरकार बनी, उनके सियासी कद का हमेशा ध्यान रखा गया।
राज्यसभा व विधान परिषद पर भी निगाह
सपा सूत्रों का कहना है कि राज्यसभा और विधान परिषद पर भी आजम खां की निगाह है। रामपुर से उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दिया है। ऐसे में यहां उप चुनाव होना है। जाहिर है कि आजम खां रामपुर लोकसभा उपचुनाव पर मनपसंद उम्मीदवार चाहेंगे। क्योंकि उपचुनाव में परिवार के किसी व्यक्ति केमैदान में उतरने की संभावना नहीं है। वह राज्यसभा व विधानसभा, विधान परिषद में परिवार या अपने खास व्यक्ति को भेजने की ख्वाहिशमंद हैं।
आजम ने कहा... नहीं जानता इस नफरत का सबब
मैं लंबे समय से जेल में था, पता नहीं राजनीतिक रूप से क्या हुआ। कुछ मजबूरियां रही होंगी (सपा की )। मुझे कोई शिकायत नहीं है लेकिन अफसोस है कि कोई बदलाव नहीं आया। अब सोचूंगा कि मैं अपनी वफादारी, कड़ी मेहनत और ईमानदारी में कहां चूक गया कि इस कदर नफरत का सबब बन गया। बहरहाल, मैं उन सभी का शुक्रगुजार हूं, जिन्होंने मेरे लिए प्रार्थना की और सहानुभूति दी। चाहे वह सपा, बसपा, कांग्रेस, टीएमसी, या यहां तक कि भाजपा हो, सभी दलों को समाज के कमजोर लोगों के बारे में सोचने की जरूरत है।