विहिप के संरक्षक अशोक सिंघल को मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की ओर से तवज्जो दिए जाने की आजम खां की टिप्पणी पर शिवपाल सिंह यादव ने जवाब दिया है।
एक प्रेस कांफ्रेंस में शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि सीएम से कोई भी मिल सकता है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह आजम खां से नाराज हैं तो उनका कहना था कि नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। वह आजम खां से बात करेंगे।
उधर आजम खां ने भी एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई और मीडियावालों पर टिप्पणी करते हुऐ बोले, शिवपाल सिंह यादव मुझसे नाराज नहीं हैं लेकिन आप सब ऐसा चाहते हैं।
सपा के वरिष्ठ नेता और संसदीय कार्य एवं नगर विकास मंत्री आजम खां ने विश्व हिंदू परिषद के संरक्षक अशोक सिंघल को सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से अधिक तवज्जो देने पर कड़ा ऐतराज जताया था।
सपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मध्यस्थता की खबरों को भी उन्होंने मुस्लिम समाज के लिए तकलीफदेह करार दिया।
उनका कहना था कि बाबरी मस्जिद शहीद करने के इतने सालों बाद मध्यस्थता का अर्थ समझ से परे हैं। सिंघल जैसे लोगों को तवज्जो दिया जाना भी मुनासिब नहीं है।
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आजम ने उम्मीद जताई कि मुलायम सिंह अपनी छवि से कोई समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि बाबरी मस्जिद को ताकत के बल पर शहीद किए हुए काफी वक्त हो चुका है।
6 दिसंबर 1992 को राम मंदिर बना भी दिया गया। ऐसे में बाबरी मस्जिद के लिए मध्यस्थता का क्या अर्थ है, यह समझ से परे है। बाबरी मस्जिद की शहादत अशोक सिंह और अराजक तत्वों द्वारा की गई है। जिन लोगों ने बाबरी मस्जिद को शहीद किया है, उनसे कोई भी सभ्य उम्मीद रखना बहुत बड़ी नादानी होगा।
उन्होंने कहा कि देश ही नहीं दुनिया भर के मुसलमान बाबरी मस्जिद को शहीद किए जाने के लिए अशोक सिंघल को बराबर का मुजरिम मानते हैं।
नगर विकास मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों से हाथ मिलाकर मुसलमानों में गलत संदेश जा रहा है। सिंघल जैसे लोगों को इतना अधिक महत्व दिया जाना उचित नहीं है।
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17 अगस्त को विकास के एजेंडे पर पूर्वाह्न 11 बजे होने वाली मुख्यमंत्री की प्रेस कांफ्रेंस को इन लोगों से मुलाकात के लिए दो घंटे लेट कर दिया गया।
इस खबर को जिस तरह लिखा गया है उससे मुसलमानों के दिलों में लगे जख्मों को कुरेदा गया है। उन्होंने कहा कि यदि मध्यस्थता बाबरी मस्जिद बनाने के लिए की जा रही है तो इस पर विचार किया जा सकता है।
लेकिन, इस मुद्दे पर कई मुकदमें न्यायालयों में लंबे अरसे से विचाराधीन हैं। इनमें अंतिम फैसला होने तक बाबरी मस्जिद का पुनर्निर्माण संभव नहीं है।
न्यायालय में बाबरी मस्जिद परिसर को टुकड़ों में बांट चुका है। ऐसे में किस टुकड़े के लिए अशोक सिंघल से मध्यस्थता की जाएगी, यह भी गौरतलब है।
आजम खां ने कहा, '1992 में बाबरी मस्जिद को गिराए जाने के बाद ही मुल्क के लोगों ने जाना कि आरडीएक्स, एके-47 और मानव बम क्या चीज है? इसी के बाद सांप्रदायिक दंगे भड़के। मुसलमानों को भारी जानी और माली नुकसान हुआ।'
आजम ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया मुलायम सिंह यादव से उम्मीद जाहिर की है कि वह उस छवि से कोई समझौता नहीं करेंगे जिससे वह और उनके साथी लंबे संघर्ष के बाद यहां तक पहुंचे हैं।