श्रीराम की भक्ति में सराबोर श्रद्धालु यहां आकर अपने आराध्य से जुड़ी स्मृतियों को सहेजने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। यही वजह है कि पिछले कई वर्षों से सुस्त रहा मूर्तियों का कारोबार भी अब यहां रफ्तार से दौड़ रहा है। लाभ बढ़ा तो मूर्तियां बेचने और कारीगरी करने वाले भी उत्साहित नजर आ रहे हैं।
मूर्ति विक्रेता सुरेश गिरी बताते हैं कि एक साल पहले दिनभर में पांच छोटी मूर्तियां बेचना भी मुश्किल था। अब बड़ी और छोटी मिलाकर 20-25 मूर्तियां आसानी से बिक जाती हैं। यहां आने वाले भक्त रामदरबार की मूर्तियां अधिक पसंद करते हैं। मांग बढ़ने की वजह से काम में तेजी आई है। मुनाफा भी बढ़ा है। दुकान पर 10 रुपये से लेकर दो लाख तक की मूर्तियां हैं। हालांकि, अधिक दामों वाली मूर्तियों के लिए पहले से ऑर्डर देना पड़ता है। राम दरबार 500 रुपये से शुरू होता है। पत्थर और आकार के अनुसार दाम बढ़ते रहते हैं।
अलग-अलग पत्थरों की मूर्तियां
सुरेश ने बताया कि सभी मूर्तियां आकार और कारीगरी के हिसाब से अलग-अलग पत्थरों से बनती हैं। रामदरबार मार्बल डस्ट से बनाया जाता है। श्रीराम की मूर्ति मकराना और सफेद मार्बल से बनती है। इसी प्रकार अलग-अलग देवी-देवताओं की मूर्तियां उनके रंग के हिसाब से ग्रेनाइट और मार्बल से बनाई जाती हैं। ये पत्थर राजस्थान के अलग-अलग शहरों से आते हैं। मूर्तियां भी वहीं से बनकर आती हैं। यहां आने के बाद स्थानीय कारीगर इन पर पॉलिश व रंग-रोगन का काम करते हैं।
इतनी बढ़ेगी मांग, नहीं था अनुमान
रामपथ पर मूर्तियों के दुकानदार आकाश गोस्वामी बताते हैं कि सभी मूर्तियां राजस्थान से मंगानी पड़ती हैं। इसके लिए पहले ऑर्डर दिया जाता है। उम्मीद जताई जा रही थी कि 22 जनवरी के बाद बिक्री और बढ़ेगी। अब स्टॉक का अंदाजा लगाना मुश्किल पड़ रहा है कि कितना मंगाया जाए।पहले से ही मांग इतनी बढ़ जाएगी, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
बढ़ाने पड़े कारीगर
आकाश ने बताया कि इन दिनों मूर्तियाें की बिक्री बढ़ने की वजह से पॉलिश और पेंट करने वाले कारीगरों की संख्या बढ़ानी पड़ी है। पहले एक कारीगर से ही काम चल जाता था। अब तीन से चार लोग बढ़ाने पड़े हैं।