राम मंदिर निर्माण के लिए अयोध्या पहुंचीं एलएनटी की बड़ी-बड़ी मशीनें
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आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वीएस राजू की अध्यक्षता में गठित 8 टॉप इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट मंदिर की नींव से जुड़े कामों पर नजर बनाए हुए हैं। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सूत्रों के अनुसार इंजीनियर की कमेटी की रिपोर्ट पर ही नए सिरे से नींव की शुरुआत होगी। एक्सपर्ट की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी। यह रिपोर्ट मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट के बीच रहेगी।
नींव में इस्तेमाल किए जा सकते हैं भारी पत्थर
मंदिर स्थल के नीचे मिली बालू को देखते हुए कहा जा रहा है कि मंदिर नींव में भारी पत्थरों का इस्तेमाल हो सकता है। जो सैकड़ों वर्ष तक सुरक्षित रहते हैं और जमीन के नीचे रहने पर भी उनका क्षरण नहीं होता है।
राम मंदिर की प्रस्तावित तस्वीर
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मिर्जापुर के गुलाबी पत्थरों की गुणवत्ता और सुंदरता को देखते हुए श्रीराम मंदिर में इसका इस्तेमाल हो सकता है। राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों की खदानों से निकलने वाले उप खनिजों पर भरतपुर जिला प्रशासन की रोक के बाद श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट तथा नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) की नजर मिर्जापुर के अहरौरा व चुनार के गुलाबी पत्थरों पर है।
इन पत्थरों के नमूने परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण होने के बाद यहां के पत्थरों के मंदिर निर्माण में इस्तेमाल किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट को साढ़े चार लाख घन फीट से भी ज्यादा गुलाबी पत्थरों की आवश्यकता है।
एनजीटी की टीम खनन इलाके के पत्थर कटर प्लांट के व्यवसायियों से मुलाकात भी की है। इसके पूर्व भी मंदिर निर्माण ट्रस्ट की ओर से पत्थरों के नमूने लिए गए थे। पत्थरों की दर के अनुसार, इस पर तकरीबन 40 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार मंदिर की 60 मीटर गहरी नींव की ऊपरी सतह पर 1200 पिलर पायलिंग करके तैयार करने की योजना है। लगभग ढाई एकड़ क्षेत्र में एक लाख पांच हजार 147 वर्गफीट क्षेत्रफल पर पिलर लगाए जाने हैं। एनजीटी तथा निर्माण इकाई से जुड़े ट्रस्ट के लोगों ने बताया कि पत्थर की गुणवत्ता का वैज्ञानिक परीक्षण विशेषज्ञों की टीम कर रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद निर्णय लिया जाएगा।
कटर प्लांट संचालकों ने बताया कि अहरौरा के गुलाबी पत्थरों की गुणवत्ता काफी अच्छी रही है। इसका रंग कभी सुंदरता नहीं खोता है। पूर्व में किले की दीवार और महलों के निर्माण में इसका उपयोग किया जाता रहा है। नक्काशी के उभार में भी इन पत्थरों का अपना विशेष महत्व है। इनमें आसानी से नक्काशी की जा सकती है। इन पत्थरों में अत्यधिक भार सहन करने की क्षमता है। भारी दबाव का इन पर कोई असर नहीं होता है। कारोबारियों ने राम मंदिर निर्माण के लिए अहरौरा इलाके से गुलाबी पत्थर की आपूर्ति को गौरव का विषय बताया।