सरयू की आरती करते सीएम योगी
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रामराज्य के आदर्श के उल्लेखों के साथ मुख्यमंत्री का प्रदेश में गरीबों को होली तक दाल, तेल, नमक सहित हर महीने 35 किलोग्राम मुफ्त राशन देने की घोषणा भाजपा विरोधियों की मुश्किलें और बढ़ाएगी। योगी ने इस काम को प्रधानमंत्री मोदी सरकार के रामराज्य की परिकल्पना साकार करने के संकल्प के साथ जोड़ा और संकेतों से यह समझाने की कोशिश की कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वह तथा भाजपा की अन्य राज्य सरकारें रामराज्य के आदर्श पर काम करके लोगों को गरीबी से निकालने की कोशिश कर रही हैं। साथ ही जिस तरह गरीबों की समस्याओं के समाधान को हिंदुत्व की आस्था से जुड़े स्थलों के विकास से सृजित होने वाले रोजगार के अवसरों से जोड़ा उससे भी यह साफ हो गया कि 2022 की चौसर पर भाजपा की तरफ से विपक्ष की हिंदुत्व के मुद्दे पर चौतरफा घेराबंदी की तैयारी है।
कब्रिस्तान से भी दी एजेंडे को धार
हिंदुत्व के मुद्दे पर विपक्ष की घेराबंदी में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी, इस बात का संकेत भी मिल गया। पहले की सरकारों में कब्रिस्तानों पर खर्च होने वाला धन अब सांस्कृतिक स्थलों के विकास पर व्यय हो रहा है, मुख्यमंत्री ने यह कहकर भी भाजपा व गैर भाजपा सरकारों की आस्था व प्राथमिकताओं को समझाने की कोशिश की। इससे उन्होंने सिर्फ हिंदुओं की नब्ज पर हाथ ही नहीं रखा, बल्कि अयोध्या के विकास के लिए फिर करोड़ों रुपये की योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास और हिंदुओं के अन्य आस्था के स्थलों पर हो रहे कामों का जिक्र करते हुए लोगों के दिमाग में यह बात भी बैठाने की कोशिश की 2022 में भाजपा सरकार फिर क्यों जरूरी है।
इससे यह संदेश भी निकलता दिखा कि जरा सी चूक भारतीय सांस्कृतिक आस्था पर भरोसा रखने वालों को देश व प्रदेश में फिर दूसरे दर्जे का नागरिक बना देगी। भगवान राम की वापसी के मंचन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह के साथ जिस श्रद्धा व समर्पण भाव से उनकी अगवानी की...। तिलक किया...। आरती उतारी...। संतों के सम्मान में पूरी सरकार पलक पांवड़े बिछाती दिखी...। संतों का सम्मान हुआ...। सरयू आरती के साथ रामलीला के सरोकारों के संदेश को सम्मान सहित समाज के लोगों को एहसास कराने की प्रतिबद्धता प्रदर्शित की... । दुनिया के कुछ देशों के राजदूतों की उपस्थिति में भगवान राम की सांस्कृतिक विरासत और चेतना को मुख्यमंत्री ने वैश्विक विस्तार को और मजबूती देने की जिस तरह से कोशिश की, उससे सरयू तट पर जले लाखों दीपों की ज्योति 2022 की राजनीतिक बिसात पर हिंदुत्व के सरोकारों की छटा को और ज्यादा बिखेरती दिखी ।