असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए थे। परीक्षा में रेंडमाइजेशन न होना सबसे बड़ा सवाल बना। भर्तियों में आरोप लगता रहा है कि नकल माफिया एक साथ फॉर्म भरकर रोल नंबर आवंटित करा लेते हैं और उसमें अलग-अलग सॉल्वर बैठाकर पैसे लेकर लोगों को पास कराते हैं। अभ्यर्थियों का आरोप था कि परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे पर्याप्त संख्या में नहीं थे जिससे नकल विहीन परीक्षा के दावे कोरे साबित हुए। आयोग ने परीक्षा केंद्रों पर 45 मिनट पहले पहुंचने की बाध्यता लागू की थी लेकिन अभ्यर्थियों का आरोप था कि कई केंद्रों पर इस मानक का पालन नहीं किया गया और निर्धारित समय के बाद आने वालों को भी प्रवेश दिया गया। एसटीएफ ने आयोग के एक आउटसोर्स कर्मचारी को गिरफ्तार किया जिस पर गंभीर आरोप लगे कि वह परीक्षा में अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था।