लखनऊ। राजधानी की नौ विधानसभा सीटों में सिर्फ छह पर ही इस बार महिला प्रत्याशी चुनावी मैदान में थीं। इनमें भाजपा, सपा, बसपा और कांग्रेस के साथ ही कई अन्य छोटे दलों की कुल 12 महिला दावेदार मैदान में थीं। भारतीय जनता पार्टी ने सिर्फ एक महिला को टिकट दिया और उन्हें जीत भी मिली। वहीं कांग्रेस और सपा ने दो-दो महिला प्रत्याशी उतारे थे। बसपा से एक भी महिला मैदान में नहीं थी। कुछ सीटों पर सपा की महिला प्रत्याशियों ने कांटे की टक्कर दी और अंत तक मुकाबले को रोचक बनाए रखा।
मलिहाबाद में जय देवी को लगातार दूसरी बार भाजपा ने टिकट दिया। जय देवी को 10,6372 वोट मिले। यहां सीधी लड़ाई सपा के सुरेंद्र कुमार से थी, जिन्हें 98827 वोट मिले। जय देवी ने लगातार दूसरी बार जीत कर क्षेत्र में कमल की ताजगी कायम रखी। 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा की राजबाला को कड़ी टक्कर दी थी और 19668 मतों से हराया था। तब उन्होंने 94677 मत हासिल किए थे।
आखिरी वक्त तक लड़ाई में, फिर गड़बड़ाया गणित
लखनऊ उत्तर सीट पर सपा और भाजपा के बीच रोचक टक्कर देखने को मिली। एक वक्त ऐसा था कि सपा की प्रत्याशी पूजा शुक्ला को सभी ने विजयी मानकर बधाई संदेश चलाने शुरू कर दिए थे। अचानक पासा पलटा और भाजपा के डॉ. नीरज बोरा ने बढ़त बनाई। फिर पूजा को पीछे छोड़ते हुए आगे निकल गए। पूजा शुक्ला को 105208 मत तो नीरज बोरा को 139159 मत मिले। वहीं मोहनलालगंज में भी सपा प्रत्याशी सुशीला सरोज ने भाजपा के अमरेश कुमार को कड़ी टक्कर दी। शुरुआत में ठीक-ठाक बढ़त के बाद फिर पासा पलटने लगा। सुशीला सरोज को 90,541 वोट मिले और विजयी प्रत्याशी को 1,07,089 मत प्राप्त हुए।
...पर वोट में तब्दील नहीं हुईं सुर्खियां
कांग्रेस ने लखनऊ मध्य से सदफ जाफर को टिकट दिया था। सीएएनआरसी के विरुद्ध चले आंदोलन में भागीदारी की वजह से सदफ जाफर शहर में एक चर्चित चेहरा रहीं। हालांकि यह बात साफ हो गई कि सुर्खियों में रहना वोट मिलने की गारंटी नहीं हो सकता। उन्हें महज 2927 वोट मिले। वहीं नगर निगम की तेज-तर्रार पार्षद ममता चौधरी को कांग्रेस ने मोहनलालगंज से चुनाव मैदान में उतारा। स्थानीय मुद्दों और लोगों के अधिकारों के लिए नगर निगम में हमेशा सक्रिय रहने वाली ममता टिकट मिलने के बाद से चर्चित तो रहीं, लेकिन बतौर पार्षद उनकी लोकप्रियता उन्हें वोट नहीं दिलवा सकी। उन्हें महज 2990 वोट मिले। वहीं पश्चिम से कांग्रेस ने शहाना सिद्दिीकी को टिकट दिया था, उन्हें 2796 वोट मिले।
ये भी उतरीं मैदान में लेकिन रहीं गुमनाम
कुछ अन्य महिलाएं भी चुनाव मैदान में थीं लेकिन उनके नाम की चर्चा कम ही हुई। मलिहाबाद से बहुजन आवाम पार्टी की नीलम सरोज (418) लखनऊ पश्चिम से राष्ट्रीय राष्ट्रवादी पार्टी से कांति पांडेय (90) जन अभियान पार्टी से कायनात सिद्दीकी (136), लखनऊ उत्तर से सोशलिस्ट पार्टी की रानी सिद्दीकी (72), लखनऊ पूर्व से गांधियन पीपुल्स पार्टी की विजय लक्ष्मी जयसवाल (102 वोट) और समाज सेवक पार्टी की शिवा गुप्ता (208 वोट) शामिल हैं।
चुनाव 2017 : तीन को मिला था टिकट, तीनों ने दिलाई थी जीत
2017 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने कैंट से रीता बहुगुणा जोशी को प्रत्याशी बनाया था। कांग्रेस छोड़कर भगवा चोला पहनने वाली प्रो. रीता को 95402 मत हासिल हुए थे। उनके आगे मुलायम की बहू अपर्णा यादव की नहीं चली थी, उन्हें महज 33796 वोट मिले थे। इसी तरह मलिहाबाद में पहली बार कमल खिला, वो भी जय देवी के कारण। अचानक से बदली परिस्थितियों में सरोजनीनगर में भाजपा का चेहरा बनी थीं स्वाति सिंह। उन्होंने सपा के अनुराग यादव को 34179 मतों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की थी।