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सोना नहीं, अब कुछ और खोजा जा रहा डौंडियाखेड़ा में

Tue, 29 Oct 2013 08:52 PM IST
अभिषेक यादव/लखनऊ
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उन्नाव के डौंडियाखेड़ा में सोने की तलाश में की जा रही खोदाई अभी नहीं रुकेगी।
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बल्कि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) एक और ट्रेंच बनाकर नई जगह खोदाई शुरू करेगा।

12 दिन में कोई सोना नहीं मिलने के बावजूद जारी खोदाई पर विभाग का कहना है कि उसे सोने से कोई लेना देना नहीं है, वह यहां प्राचीन व पुरातत्व के महत्व की वस्तुओं की तलाश में काम जारी रखे है।

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विभाग के सूत्रों के अनुसार काम जारी है और इसे अभी बंद नहीं किया जाएगा।

सोने को लेकर जो भी कयास लगाए गए थे और भविष्यवाणियां की गई थीं, वे सभी अब तक निर्मूल साबित हुई हैं।

खुद एएसआई का भी मानना है कि यहां कोई सोना नहीं मिलना है। वह जो खोदाई करवा रहा है उसका लक्ष्य सोना नहीं, यहां प्राचीन समय की वस्तुओं की तलाश है।

इस बारे में डौंडियाखेड़ा एक्सकेवेशन के प्रभारी व एएसआई के अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. बीआर मणि ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि खोदाई की गति धीमी है।
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क्योंकि एएसआई को इससे मतलब नहीं है कि सोना निकलता है या नहीं। मिट्टी में दबी कुछ वस्तुएं पुरातत्व महत्व व ऐतिहासिक तथ्यों को जोड़ने के लिहाज से काम की हो सकती हैं।
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ऐसे में मिट्टी और यहां से निकल रही वस्तुओं की गहन पड़ताल करते हुए खोदाई की जा रही।

अब तक निकली सामग्री जिसमें हड्डियां, चूड़ी व घड़ों के टुकड़ों, ईंटों आदि को अध्ययन के लिए इकट्ठा किया गया है लेकिन इसमें सोना निश्चित तौर पर नहीं है।

टीलों की खोदाई की मांग
डॉ. भीमराव अंबेडकर महासभा ने एएसआई से डौंडियाखेड़ा में मौजूद गुनीर और कुटीर टीलों की खुदाई की मांग की है।

महासभा अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल का कहना है कि यहां वे स्तूप निकल सकते हैं, जिनमें गौतम बुद्ध के अवशेष संरक्षित किए गए थे। इसे लेकर विभाग को ज्ञापन दिया गया है।

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