लूट के बाद चलती ट्रेन से धकेली गईं अरुणिमा सिन्हा को अंतत: हादसा पीड़ित मान लिया गया है। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल ने रेल मंत्रालय को उन्हें 7.2 लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
साथ ही क्लेम दायर करने के वर्ष यानी 2011 से अब तक 6 प्रतिशत ब्याज भी देने को कहा गया है। जज राघवेंद्र प्रताप पांडेय और रेल अधिकारी एके श्रीवास्तव की बेंच ने अपने आदेश में अरुणिमा को मुआवजे का हकदार माना है।
पहले रेलवे ने इससे इन्कार कर दिया था। इसके बाद 2011 में उन्होंने यह क्लेम दायर किया। बता दें कि 11 अप्रैल 2011 को पद्मावत एक्सप्रेस से लखनऊ से दिल्ली जाते समय बरेली के निकट चनेहटी स्टेशन से आगे उन्हें कुछ लुटेरों ने ट्रेन से बाहर फेंक दिया था।
रात भर वह ट्रैक पर तड़पती रहीं। लोगों ने जब सुबह देखा तो उन्हें अस्पताल पहुंचाया। बाद में उनका इलाज एम्स में हुआ, जहां टूटे हुए बाएं पैर को काटना पड़ा। 15 अप्रैल को उनकी ओर से चार लाख रुपये का क्लेम दायर किया गया।
रेलवे ने कहा, खुद की गलती से गिरी थी
अरुणिमा सिन्हा
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सुनवाई के दौरान 13 नवंबर 2017 को खुद अरुणिमा भी जिरह के लिए उपस्थित हुईं। मामले में अरुणिमा के वकील जानकीशरण पांडेय ने बहस की।
सुनवाई के दौरान उत्तर रेलवे की ओर से कहा गया कि रेलवे एक्ट की धारा 123-सी के तहत उन यात्रियों को मुआवजा दिया जाता है जो ट्रेन में यात्रा करते समय किसी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के शिकार हो जाते हैं।
अरुणिमा को लगी चोटें खुद उनकी लापरवाही से आई हैं। ऐसे में उनके द्वारा मांगा गया क्लेम स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
अरुणिमा की ओर से यात्रा टिकट, स्टेशन मास्टर का मेमो व डायरी और घटना के बारे में अखबारों की कटिंग प्रस्तुत की गई। इनमें बताया गया था कि अरुणिमा को लुटेरों ने ट्रेन से बाहर फेंका था। इसी वजह से उन्हें चोटें लगीं। ऐसे में वह मुआवजे की हकदार हैं।
ट्रिब्यूनल ने कहा, खिलाड़ी का सपना टूटा
डेमो
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सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने कहा, अरुणिमा निश्चित तौर पर ट्रेन यात्री थी और उनके साथ दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जो रेलवे एक्ट की परिभाषा के अंतर्गत आती है। उन्हें जो चोटें लगी हैं वह स्वयं में साक्ष्य है।
रेलवे के नियमों में दिसंबर 2016 में हुए बदलावों के बाद अरुणिमा 5.6 लाख मुआवजे की हकदार हैं। वे एक खिलाड़ी थीं और राष्ट्रीय स्तर पर खेलना चाहती थीं। उनका यह सपना अब कभी पूरा नहीं हो सकेगा।
इसकी भरपाई पैसों से नहीं हो सकती। फिर भी जो कुछ उन्हाेंने सहा, उसके लिए 1.6 लाख रुपये का मुआवजा भी मिलना चाहिए। इसलिए आदेश दिए जाते हैं कि अरुणिमा को रेलवे कुल 7.2 लाख रुपये मुआवजा देगा।
इसमें से 3.6 लाख के मुआवजे पर क्लेम दायर होने से 31 दिसंबर 2016 तक और 1 जनवरी 2017 से क्लेम देने तक छह प्रतिशत की दर से ब्याज देना होगा।
इसके लिए रेलवे को 90 दिन दिए जाते हैं। इस अवधि के बाद उस पर 9 प्रतिशत की दर से ब्याज लगेगा। इस रकम में से 3.2 लाख रुपये उसे ब्याज सहित नगद दिया जाएगा। वहीं, 4 लाख रुपये उनके नाम से बैंक अकाउंट में एफडी किए जाएंगे। एफडी की रकम 3 वर्ष बाद मिलेगी।