स्वास्थ्य महानिदेशालय केअधिकारी जिलों के सीएमओ और सीएमएस से परेशान हैं। ये महानिदेशालय या सीएमएसडी से भेजे किसी भी ई-मेल को न तो देखते हैं और न जवाब देते हैं। इस मामले में भी उन्होंने ई-मेल का जवाब नहीं दिया। एक अधिकारी ने बताया कि हार्ड कॉपी डाक से जाने और जवाब आने में कई दिन लगते हैं। इसीलिए ई-मेल किया जाता है लेकिन उसे अधिकारी देखते ही नहीं। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. पद्माकर सिंह का कहना है कि समय पर ई-मेल न देखने की कुछ शिकायते हैं। अधिकारियों को इसके लिए पत्र भेजा गया है।
उच्चाधिकारियों को भी नहीं देते सूचना
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी बच्चों को दी जाने वाली दवा की जांच में भी लापरवाही बरत रहे हैं। न तो समय पर कार्रवाई होती है और न अधिकारी अपने उच्चाधिकारी को कोई जानकारी देते हैं। एफएसडीए ने सीतापुर के नमूने की जांच तो करा ली लेकिन स्वास्थ्य विभाग को उसकी रिपोर्ट नहीं भेजी ताकि आगे कार्रवाई हो सके। केंद्रीय औषधि भंडार (सीएमएसडी) के अधिकारियों के पूछने पर उन्हें जांच रिपोर्ट दी गई। इसके बाद सीएमएसडी के अधिकारियों ने स्वास्थ्य महानिदेशक को कोई जानकारी नहीं दी। महानिदेशक से पूछा गया तो उन्होंने रिपोर्ट नहीं मिलने की बात कही।
करेंगे कार्रवाई
सीएमएसडी के संयुक्त निदेशक डॉ. रामजी वर्मा ने कहा कि कंपनी को ब्लैक लिस्ट करने के लिए नोटिस जारी किया गया है। यह एक कानूनी प्रक्रिया है। जवाब के बाद उस पर कार्रवाई की जाएगी। एफएसडीए की रिपोर्ट भी मिल गई है। उसमें सिरप की पैंकिंग में गड़बड़ी पाई गई है।