लखनऊ। प्रदेश के कई जिलों में डकैती डालकर दहशत फैलाने वाले बांग्लादेशी डकैतों को 24 परगना जिले से सीमा पार कराने वाले दो संदिग्धों की सूची पुलिस ने तैयार कर ली है। भारतीय सीमा में अवैध तरीके से घुसपैठ कराने वालों की लखनऊ पुलिस कुंडली तैयार कर रही है। इन सभी के बारे में पुलिस गिरफ्त में आए डकैतों ने ही जानकारी दी थी। इसके बाद पुलिस ने अपने स्तर से और जानकारियां जुटाई हैं। पुलिस का दावा है कि जल्द ही ऐसे लोेगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं फरार बांग्लादेशी डकैतों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है।
एडीसीपी पूर्वी कासिम आब्दी के मुताबिक, गिरफ्तार डकैतों ने ही खुलासा किया था कि उन्हें बांग्लादेश सीमा पर घुसपैठ कराने वाले 5 से 10 हजार रुपये लेकर पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले की सीमा से भारत में प्रवेश कराया जाता है। इसके लिए वहां कुछ लोगों से संपर्क करते हैं। उनसे सौदा तय करने के बाद ही सीमा में प्रवेश मिलता है। जो लोग पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले से भारतीय सीमा में प्रवेश कराते हैं। उनमें से कुछ लोगों का उत्तर प्रदेश के कई जिलों में आना-जाना है।
डीसीपी पूर्वी संजीव सुमन की सर्विलांस टीम ने बांग्लादेशी डकैतों के बारे में जानकारी जुटाई हैं। इसके बाद चिनहट पुलिस के साथ मिलकर मल्हौर रेलवे स्टेशन के पास मुठभेड़ में तीन डकैतों को दबोच लिया। पूछताछ में तीनों ने लखनऊ, वाराणसी सहित प्रदेश के कई इलाकों में वारदात की बात कुबूल की। इसके आलावा इन डकैतों ने मध्य प्रदेश, दिल्ली सहित कई अन्य राज्यों में भी वारदात करने की बात कुबूली थी। बांग्लादेशी डकैतों के गिरोह ने विभूतिखंड के सहारा अस्पताल के पास रहने वाले गन्ना विभाग में तैनात इंजीनियर वाईके श्रीवास्तव के घर धावा बोलकर उनकी पत्नी व बेटी को बंधक बनाकर लाखों की लूटपाट की थी।
गिरफ्तार डकैतों में रबीउल ने फरार साथियों के नाम हमजा, असलम, नासिर, बिल्लाल, इस्लाम, शुमान और नूर खान बताये थे। इन डकैतों के संभावित ठिकानों पर पुलिस टीम लगातार दबिश दे रही है। लेकिन अभी चार दिन बाद भी कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी। वहीं डकैतों ने सीमा पार कराने वाले कई लोगों के नाम बताये है। इनमें से लखनऊ पुलिस ने दो की पहचान कर ली है। इनके बारे में पूरी जानकारी हासिल करने में जुट गई। इसमें यह पता लगाया जा रहा है कि सीमा पार कराने वाले डकैतों के साथ तो प्रदेश में नहीं आते थे। कहीं सीमा पार कराने वाले ही डकैतों का गिरोह तो नहीं संचालित कर रहे है। क्योंकि लूटपाट के सामान डकैत यहीं बेचते थे। सिर्फ सीमा पार अपने रिश्तेदारों व परिचितों को बुलाकर रुपये अपने परिवारीजनों के पास भेजते थे।