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व्यावसायिक उपयोग के लिए दोबारा करना होगा आवेदन

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राजधानी में नियोजित कॉलोनियों में 24 मीटर या अधिक चौड़ी सड़कों पर स्थित आवासीय भवनों में व्यावसायिक उपयोग की अनुमति एलडीए बोर्ड ने दी है। लेकिन, जिन रसूखदारों की वजह से इस पूरी प्रक्रिया और एलडीए की साख पर दाग 2016-17 में लगा, उन्हें भी आवासीय में व्यावसायिक गतिविधि के लिए दोबारा अनुमति लेनी पड़ेगी। इनकी जमा धनराशि को आवेदन के समय समायोजित किया जाएगा। हालांकि, एलडीए लंबित प्रक्रिया वाले आवेदकों को अपना पैसा वापस लेने का भी विकल्प देगा।
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एलडीए के अधिकारियों का कहना है कि पूर्व में आवेदन करने वालों में करीब 350 की प्रक्रिया लंबित है। शासन से आपत्ति के बाद तत्कालीन वीसी प्रभु एन सिंह ने अगले आदेश तक इस प्रक्रिया को रोक दिया था। इसके पीछे एलडीए की खराब हुई छवि और आरडब्ल्यूए व सिविल सोसाइटी की तरफ से की गई शिकायत को वजह माना गया। अब एलडीए ने पूर्व में बने नियमों को सख्त बनाते हुए फिर बिना भू-उपयोग बदले प्रभाव शुल्क लेकर आवासीय में व्यावसायिक उपयोग की सशर्त अनुमति देने के लिए पूर्व से रुकी प्रक्रिया शुरू की गई है। लेकिन पूर्व में आवेदन कर चुके रसूखदारों को नए सिरे से आवेदन करना होगा।
सभी नियम-कायदे ताक पर रहे
2016-17 में जब यह आवासीय में व्यावसायिक उपयोग की प्रक्रिया चली तो तत्कालीन सरकार में दखल रखने वाले रसूखदार सबसे पहले इसका लाभ लेने के लिए लाइन में लग गए। उनके लिए विशेष रूप से 72 और 21 आवेदनों की सूची बनी। इन सूचियों को बोर्ड की बैठक में अनुमति के लिए रख दिया गया, लेकिन इस पर विवाद खड़ा हो गया तो एक और सूची आम लोगों के 258 आवेदनों के साथ बनी। इन आवेदनों में न्यूनतम आवश्यकता यानी 12 मीटर चौड़ी सड़क के नियम को ताक पर रखा गया। नौ मीटर चौड़ी सड़क तक के आवेदन एलडीए के तत्कालीन अधिकारियों ने स्वीकार कर लिए। हालांकि, अब 24 मीटर चौड़ी सड़का का नियम लागू होने के बाद पूर्व के कई आवेदक खुद ही अर्हता से बाहर हो जाएंगे।
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भू-उपयोग के लिए इनके आए थे आवेदन
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की समधी अंबी बिष्ट व अरविंद सिंह बिष्ट और पत्नी साधना गुप्ता, भाई व प्रसपा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव, पूर्व वीसी व उनकी पत्नी डॉ. मीता सिंह व सत्येंद्र सिंह, पूर्व सचिव आवास पंधारी यादव। इनके अलावा शहर के प्रमुख कारोबारी, नामी डॉक्टर, स्कूल प्रबंधक, ब्यूरोक्रेट्स, नेताओं ने अपने खुद के या परिवारीजनों के नाम से भू-उपयोग परिवर्तन कर आवासीय में व्यावसायिक गतिविधि के लिए आवेदन किए थे। इनके नाम सूची में प्रमुखता से शामिल किए गए, ताकि सबसे पहले इन्हें फायदा मिल सके।
नहीं बदलेगा भू-उपयोग
व्यावसायिक उपयोग की प्रक्रिया से जुड़े एलडीए के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि आवासीय में व्यावसायिक उपयोग को भू-उपयोग परिवर्तन नहीं माना जाए। अभी मौजूदा निर्माण या नए निर्माण में दोगुना प्रभाव शुल्क देकर कु छ समय के लिए व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति दी जाएगी। अनुमति मिल जाने के बाद भवन तोड़कर निर्माण कराया गया तो यह अनुमति खत्म हो जाएगी। वहीं पूर्व से तय आवासीय भूखंड का भू-उपयोग ही प्रभावी रहेगा। मौजूदा निर्माण में व्यावसायिक उपयोग के लिए प्रभाव शुल्क के साथ जरूरी शमन मानचित्र भी स्वीकृत कराना जरूरी होगा। इसका शुल्क अलग से देना होगा। केवल प्रभाव शुल्क देकर नया निर्माण ही कराया जा सकता है।
पूर्व के जो भी आवेदन लंबित हैं, उनके लिए संबंधित अधिकारियों के साथ विमर्श किया जा रहा है। संभावना यही है कि पूर्व के आवेदनों को बदले नियमों की प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जाएगा। इन्हें नए सिरे से आवेदन करना होगा। पहले की तुलना में अब दो गुना प्रभाव शुल्क लिया जाना है। वहीं सड़कों की चौड़ाई में भी अंतर आया है। सभी केस अलग-अलग बोर्ड से अनुमति के लिए प्रस्ताव के रूप में रखे जाएंगे। आवेदक चाहे तो पूर्व में जमा राशि को समायोजित करने की अनुमति दी जा सकती है।
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- पवन गंगवार, सचिव, एलडीए
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