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केजीएमयू में अब बिना डाई, सिर्फ दो मिनट में हो जाएगी आंखों की एंजियोग्राफी

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लखनऊ। केजीएमयू में आंख के मरीजों के लिए अच्छी खबर है। अब सिर्फ दो मिनट की जांच में आंख की सभी बीमारियों का पता चल जाएगा। इसके लिए डाई का उपयोग भी नहीं किया जाएगा। विवि के नेत्र विभाग में करीब 90 लाख रुपये से लगी ऑप्टिकल कोहरेंस टोमाग्राफी (ओसीटी) मशीन से ऐसा संभव होगा। इस मशीन की सहायता से सॉफ्टवेयर के माध्यम से आंखों की एंजियोग्राफी हो सकेगी।
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आंख के बुरी तरह से घायल होने, विस्तृत जांच या डायबिटीज वाले मरीजों के मामले में अभी तक कन्वेंशनल फ्लूरेसिन एंजियोग्राफी की ही व्यवस्था थी। इस तकनीक में पहले मरीज की आंखों में आईड्रॉप डालकर फोटोग्राफ लिए जाते थे। इसके बाद उसे डाई का इंजेक्शन देकर उसकी आंख की फोटोग्राफ लिए जाते थे। इस प्रक्रिया में एक मरीज पर कम से कम 30 मिनट का समय लगता था। डाई का उपयोग होने से एलर्जी का खतरा भी रहता था। जबकि ओसीटी एंजियोग्राफी में डाई देने की जरूरत नहीं होती है। सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही आंखों के भीतर 10 लेयर की अलग-अलग तस्वीर आने की वजह से किसी भी बीमारी या कमी का तुरंत पता चल जाता है। सॉफ्टवेयर से जांच होने की वजह से इसमें करीब दो मिनट का समय लगता है। ऐसा होने से अब मरीज देखने का ग्राफ भी बढ़ जाएगा।
मिल सकेगी खून प्रवाह की जानकारी
केजीएमयू के ऑप्थलमोलॉजी के प्रो. संदीप सक्सेना ने बताया कि इस मशीन की सहायता से यह भी पता चल जाएगा कि आंख की नसों में खून का प्रवाह कैसा है। ओसीटी मशीन का सबसे ज्यादा फायदा डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को होता है। इनकी जांच करना काफी मुश्किल काम होता है। ओसीटी मशीन की सहायता से डायबिटीज मरीजों की जांच करना संभव हो पाता है। सटीक जांच होने से मरीजों के इलाज में काफी आसानी होती है।
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डायबिटीज रोगियों को मिलेगी राहत
केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह ने कहा कि केजीएमयू प्रशासन सदैव मरीजों की बेहतर के लिए प्रयासरत रहता है। इसी कड़ी में यह मशीन लगाई है। मशीन की वजह से अब सामान्य के साथ ही डायबिटीज से पीड़ित मरीजों की जांच और इलाज में आसानी होगी।
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