डॉ. डी हिमांशु।
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किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट के प्रभारी डॉ. डी हिमांशु ने कहा कि मास्क लगाना, सामाजिक दूरी और हाथ धोने की जरूरत न्यू नॉर्मल जिंदगी का हिस्सा है। देखा ये जा रहे हैं कि लोगों के मन में कोरोना के प्रति डर में कमी आई है। लोग पहले की अपेक्षा अब बड़ी संख्या में घर से बाहर जा रहे हैं, लेकिन हमें मास्क पहने बगैर घर से बाहर नहीं निकलना है।
हाथ मिलाना, गले मिलना, बिल्कुल नहीं। घर से निकलने से पहले खुद से पूछिए कि क्या ये काम घर से हो सकता है या नहीं। जरूरत हो, तभी बाहर जाइए। वैक्सीन आते ही सब सामान्य हो जाएगा, ऐसा नहीं है। इसके आने और सबको लगने में वक्त लगेगा। मरीजों की संख्या बढ़ेगी या कम होगी, यह बहुत कुछ हमारे व्यवहार पर निर्भर करता है। जितनी जल्दी हो सके अपनी आदतें बदलिए।
प्रिंसिपल शर्मिला सिंह
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पायनियर मान्टेसरी इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह ने बताया कि कोई भी स्कूल बच्चों की सेहत से समझौता नहीं करेगा। हर कोई अपने-अपने स्तर पर हर मुमकिन तैयारी कर रहा है। स्कूलों को लेकर जारी की गई गाइडलाइन का अक्षरश: पालन किया जा रहा है। सिर्फ आने के समय ही नहीं बल्कि छुट्टी के वक्त भी बच्चों का तापमान लिया जाता है। उन्हें सैनिटाइज किया जाता है और फिर घर भेजा जा रहा है। स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा-पूरा ध्यान रखा जा रहा है। टनल सैनिटाइजर मशीन के साथ-साथ बाकी सारे इंतजाम भी किए गए है। ये बदलाव न्यू नॉर्मल का हिस्सा है। अभिभावक भी इन नियमों का पालन करें।
एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह
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एडीएम प्रशासन अमर पाल सिंह ने कहा कि ‘दो गज की दूरी, मास्क है जरूरी’ के नारे को न भूलिए। यह सच है कि लोग सेकं ड लहर को लेकर दहशत में हैं। जिला प्रशासन ऐसे किसी भी हालात से निपटने की पूरी तैयारी में जुटा है। राजधानी के लोगों को किसी भी तरह की परेशानी से बचाने को लेकर हम संकल्पबद्ध हैं। जब लॉकडाउन शुरू हुआ था, उस समय तीन ही इंस्टीट्यूट थे और बेड की संख्या भी बहुत कम थी।
धीरे-धीरे हमने संसाधन बढ़ाए और अब हमारे पास 39 ऐसे सेंटर हैं और बेड की संख्या 10 हजार के करीब है। 1000 आईसीयू बेड भी हमारे पास हैं। हमारी तैयारियां हैं, लेकिन इसके बावजूद हम सबका यह प्रयास है कि ऐसे हालात ही न पैदा हों। इसके लिए लगातार हम लोगों को हर स्तर पर जागरूक करने का प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए बाजार एसोसिएशन और होटल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों से बात चल रही है। स्कूल-कॉलेज हर स्तर पर जागरूकता के साथ-साथ विश्वास जगाने की सबके सहयोग से कोशिश जारी है। हर दिन 10,000 टेस्ट चल रहे हैं।