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अखिलेश बोले: प्राथमिकता में है गठबंधन, बात नहीं बनी तो महाराष्ट्र में लड़ेंगे अकेले चुनाव, 12 सीटों की है मांग

Sun, 14 Jul 2024 09:28 AM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Maharashtra Assembly Elections: अखिलेश यादव ने कहा कि महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव वह इंडिया गठबंधन के बैनर तले लड़ना चाहते हैं लेकिन यदि बात नहीं बनी तो सपा अकेले चुनाव में उतरेगी। 
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अखिलेश इंडिया गठबंधन से 12 सीटें मांग रहे हैं। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुंबई प्रवास के दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र का विधानसभा चुनाव इंडिया गठबंधन के तहत लड़ना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में है। अगर बात नहीं बनी तो अकेले ही चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने राज्य में संगठन मजबूत बनाने पर जोर दिया।

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सपा अध्यक्ष ने शनिवार को मुंबई में पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ संवाद किया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अगर मध्य प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तरह मुंबई में सपा को नजरअंदाज किया गया तो सपा अकेले ही चुनाव लड़ेगी। यहां बता दें कि सपा ने महाराष्ट्र में 12 विधानसभा सीटें मांगी हैं। अभी वहां उसके दो विधायक हैं।

9 को मालेगांव में जनसभा करेंगे अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव 9 अगस्त को महाराष्ट्र के मालेगांव में जनसभा करेंगे। महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष अबू आसिम आजमी ने बताया मालेगांव में सपा के 12 नगर सेवक (पार्षद)चुनकर आए थे। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पूरे राज्य में पार्टी को मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं।
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विधानसभा उपचुनावों में भी नफरती राजनीति की हार हुई: माले
भाकपा (माले) ने कहा है कि सात राज्यों की 13 विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में भाजपा की नफरती राजनीति की हार और इंडिया गठबंधन के दलों की जीत हुई है। पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि भाजपा को लोकसभा चुनाव से शिकस्त मिलने का सिलसिला विधानसभा उपचुनावों में भी जारी है।बयान जारी कर सुधाकर यादव ने कहा कि इंडिया गठबंधन के दलों को 13 में से 10 सीटों पर जीत मिली है। भाजपा समेत एनडीए के उसके सहयोगी दल को दो सीट, जबकि निर्दलीय को एक सीट मिली है। एनडीए को दो सीटों का नुकसान हुआ है। सबसे बड़ी हार पश्चिम बंगाल में मिली है। कुल मिलाकर यह दिखाता है कि इंडिया गठबंधन द्वारा उठाये गए मुद्दों को जनता का समर्थन है। भाजपा को सरकार चलाने के तौर-तरीकों को बदलने का लगातार जनादेश मिल रहा है, जिसे समझने की जरुरत है।

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