काबीना मंत्री आजम खां का मौन व्रत अब भी जारी है। वे रामपुर में अपनों के साथ मशगूल हैं। शुक्रवार को असहिष्णुता के मुद्दे पर तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आड़े हाथ लिया लेकिन अपने इस्तीफे पर पैदा हुई चर्चाओं पर कुछ नहीं बोले।
इधर सपा नेतृत्व भी इस मामले पर वेट एंड वॉच की नीति पर ही चल रहा है। सपा संगठन की राजनीति और समीकरणों पर नजर डालें तो इसकी वजहें भी हैं।
सपा के बारे में यह बात किसी से अब छिपी नहीं है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के खास होने के बावजूद पार्टी के भीतर एक बड़े वर्ग के साथ आजम के 36 के रिश्ते हैं। इनमें कई मुस्लिम नेता, विधायक और मंत्री भी शामिल हैं।