अखिलेश यादव के द्वारा गेट फांदकर कैंपस में घुसने और जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने की तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल हैं। आइए जानते हैं कि असल में हुआ क्या था।
अखिलेश यादव सुबह करीब 11:30 बजे लोक जागरण रथ में सवार होकर जय प्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) पहुंचे। उनके साथ ही बड़ी तादाद में समर्थक भी वहां आ गए। जेपीएनआईसी के गेट पर ताला पड़ा था। साथ ही टिन की चादरों की बैरिकेडिंग भी थी। कुछ समर्थकों ने गेट को हिलाकर इसे खोलने की कोशिश भी की। अखिलेश रथ से नीचे उतरे और बंद गेट पर चढ़कर अंदर चले गए। उनके साथ ही कुछ समर्थक भी गेट कूदकर अंदर चले गए। हालांकि, अखिलेश के अंदर जाने के बाद पुलिस ने तमाम सपाइयों को अंदर जाने से रोका।
जेपीएनआईसी में अखिलेश यादव ने जय प्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। उसके बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि हर वर्ष हम यहां माल्यार्पण के लिए आते हैं। जब लोकतंत्र में लोकनायक के माल्यार्पण के लिए बाधाएं खड़ी की जाएं, तो लोकतंत्र किस काम का। भाजपा, सपा का रास्ता नहीं रोक सकती। पता नहीं सरकार, गेट में ताला डालकर क्या बताना चाहती है। सच यह है कि भाजपा जेपी आंदोलन की स्मृति दोहराने से डर रही है।
उन्होंने कहा कि यह वही जेपी हैं, जिन्होंने संपूर्ण क्रांति का नारा दिया था। उस समय महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार चरम पर था, आज हालात उससे भी बदतर हैं। तब इमरजेंसी लगाई गई और न जाने कितने समाजवादी नेताओं को जेल में डाला गया। संपूर्ण क्रांति के नारे से ही परिवर्तन आया। अखिलेश ने कहा कि जनता की ताकत के आगे सरकार की ताकत का कोई असर नहीं होता। पुलिस लगाकर हमें रोक रहे हैं। अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं कि किसके आदेश से रोक रहे हैं। जेपीएनआईसी के रूप में एक ऐसा संग्रहालय बनाया है, जिससे लोग प्रेरणा ले सकते हैं। लोकतंत्र में कैसे आवाज उठाई जा सकती है, यह सीख सकते हैं।
अखिलेश ने कहा कि सरकार बताए कि आवाज दबाकर कौन सी नाकामी छिपा रहे हैं। अगर जेपीएनआईसी का काम पूरा हो जाता तो दुनिया में पहचान बनती। आज हालात ऐसे हैं कि देश की जनता को एक बार फिर इस सरकार की ताकत के खिलाफ लड़ना होगा। संपूर्ण क्रांति के जरिये समाजवादी मिलकर संविधान और लोकंत्र बचाएंगे। याद रखना कि जिस दिन बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के दिए संविधान को यह बदलने में सफल हुए, उस दिन हमारी आजादी भी छीन लेंगे।